प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आठ नवंबर रात को पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट को बंद किये जाने की घोषणा किये जाने के बाद बुधवार को भी जनपद में दिन भर अफरातफरी का महौल रहा।
आम से लेकर खास तक हर कोई इसी जुगत में लगा रहा कि किसी प्रकार पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट को चला ले लेकिन ज्यादातर लोगों ने इन नोटों को लेने से सीधे इंकार कर दिया। इस दौरान हाथों में पांच सौ का नोट लेकर भटक रहे लोगों की जुबान बरबस फूट ही पड़ा कि हम लोगों कि स्थिति इस समय उस बीमार व्यक्ति की तरह हो गयी है कि जिसके आगे छप्पन भोग का थाल तो सजा है लेकिन बीमारी के कारण खा नहीं सकता।
नोट बंद होने की घोषणा के बाद से सबसे ज्यादा परेशानी प्राईवेट अस्पतालों में भर्ती मरीजों के तीमारदारों को झेलनी पड़ी। जनपद में छोटे- बड़े अस्पतालों की संख्या लगभग तीन सौ है। बुधवार को सभी प्राईवेट अस्तपतालों के बाहर कागज लिखकर टांग दिया गया कि पांच सौ और एक हजार के नोट स्वीकार्य नहीं किये जायेंगे। जिसके चलते लोग नोट को भुनाने के जुगत में लगे रहे। उधर सभी पेट्रोल पंपों पर भी लोगों को काफी जूझना पड़ा। सौ, पचास रुपये के चेंज न होने के कारण पेट्रोल पंप कर्मियों द्वारा लोगों को पांच सौ रुपये से नीचे पेट्रोल नहीं दिया जा रहा था। जिससे पेट्रोल पंप कर्मियों और ग्राहकों के बीच जमकर झिकझिक भी हुई। हालांकि इस दौरान कई ऐसे भी लोग रहे जो सिंर्फ पांच सौ रुपए के नोट को भुनाने के लिए ही पंप पर पहुंचे। हद तो तब हो गयी जब चाय पान की दुकानों पर पांच और दस रुपये अदा करने के लिए पांच सौ रुपये तक निकालने से गुरेज नहीं किया। पांच सौ और हजार की नोट भुनाने के डर के चलते नगर में कई लोगों ने अपने ढ़ाबे तक बंद कर दिया। ढ़ाबा मालिकों का कहना रहा कि बीस या पचास रुपये के खाना खाने के बाद हर कोई पांच सौ या फिर हजार रुपये का नोट थमा दे रहा था। हर किसी को चेंज वापस करना मुमकिन नहीं हो पाया जिससे ढ़ाबा बंद करना ही मुनासिब समझा।