कोहरे के चलते गाड़ियों की लेटलतीफी स्टेशन पर इंतजार कर रहे यात्रियों पर काफी भारी पड़ने लगी है।
अधिकांश
ट्रेनें 10 से 22 घंटे तक विलंब से पहुंच रही हैं। यहां तक कि राजधानी
जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों का भी हाल यह है कि वे दस से भी अधिक घंटे लेट हो
जा रही हैं।
इस तरह समय से यात्रियों का गंतव्य तक पहुंचना असंभव
हो गया है। यदि आप को समय से गंतव्य पर पहुंचना है तो एक दिन पहले का
प्रोग्राम बनाना बेहतर होगा।
इन दिनों ट्रेनों का लेट होना आम
बात है। लेकिन सर्वाधिक खराब स्थिति अलीपुर दिल्ली महानंदा एक्सप्रेस की
है। यह ट्रेन प्रतिदिन 16 से 20 घंटे तक विलंबित चल रही है। यह ट्रेन
गुरुवार को 22 घंटे विलंब से मुगलसराय पहुंचकर गंतव्य को रवाना हुई।
विलंबित होने वाली अन्य ट्रेनों में जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस तीन घंटे, नई
दिल्ली-हावड़ा पूर्वा एक्सप्रेस तीन घंटे, अमृतसर-हावड़ा एक्सप्रेस आठ
घंटे, नई दिल्ली-हावड़ा डुप्लीकेट कालका दो घंटे, देहरादून-हावड़ा उपासना
एक्सप्रेस आठ घंटे, आनंद विहार कोलकाता एक्सप्रेस बारह घंटे, दिल्ली अलीपुर
द्वार डाउन महानंदा एक्सप्रेस नौ घंटे, देहरादून-हावड़ा दून एक्सप्रेस दो
घंटे तथा ग्वालियर हावड़ा चंबल एक्सप्रेस पांच घंटे विलंब से मुगलसराय
पहुंची। इसी क्रम में गुरुवार को अमृतसर हावड़ा पंजाब मेल निरस्त रही।
अति
महत्वपूर्ण मानी जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस भी अब काफी विलंबित हो जा
रही हैं। बुधवार को नई दिल्ली से भुवनेश्वर जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस 16
घंटे विलंब से मुगलसराय पहुंची।
इसी क्रम में गुरुवार की रात मुगलसराय
पहुंचने वाली नई दिल्ली राजेंद्र नगर पटना राजधानी एक्सप्रेस साढ़े सात
घंटे, नई दिल्ली हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस साढ़े चार घंटे, नई दिल्ली
सियालदह राजधानी एक्सप्रेस साढ़े पांच घंटे तथा नई दिल्ली भुवनेश्वर
राजधानी एक्सप्रेस छह घंटे विलंब से यहां पहुंचकर गंतव्य के लिए रवाना
हुईं।
ट्रेनों की इस लेटलतीफी से दूरदराज से स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों
को दिक्कत होती है। यहां पहुंचने पर उन्हें पता चलता है कि उनकी ट्रेन
काफी विलंबित है।