नौगढ़। तहसील परिसर में शनिवार को आयोजित समाधान दिवस के दौरान उस समय खलबली मच गई, जब तीन अधिवक्ताओं ने मिलकर तहसील परिसर में ही एक लेखपाल के साथ मारपीट की। आरोप है कि लेखपाल को न केवल पीटा गया, बल्कि उसके कपड़े फाड़ दिए गए और छाती पर घूंसे मारे गए। किसी तरह जान बचाकर लेखपाल तहसील सभागार में पहुंचा और अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। इस मामले में पुलिस ने तीन अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शनिवार को नौगढ़ तहसील में समाधान दिवस का आयोजन किया गया था। जहां बड़ी संख्या में फरियादी और अधिवक्ता मौजूद थे। लेखपाल आकाशदीप अपने कार्य में व्यस्त थे। आरोप है कि अधिवक्ता विमलेश यादव, अजीत कोल और सत्यानंद तिवारी एक साथ उनके पास पहुंचे और किसी मामले में जबरन अपनी मर्जी से रिपोर्ट लगाने का दबाव बनाने लगे। विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और तीनों ने मिलकर लेखपाल के साथ मारपीट शुरू कर दी। लेखपाल का आरोप है कि हमलावरों ने उनके कपड़े फाड़ दिए और सीने पर कई घूंसे मारे। गला दबाकर जान से मारने का भी प्रयास किया गया। हमले के दौरान आरोपी लगातार धमकी देते रहे कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो नौकरी नहीं करने देंगे। किसी तरह वे वहां से निकलकर तहसील सभागार में चल रहे कार्यक्रम के बीच पहुंचे और उपजिलाधिकारी विकास मित्तल को पूरी घटना से अवगत कराया। लेखपाल ने यह आरोप भी लगाया कि एक अधिवक्ता कई दिन से उन्हें फोन पर जान से मारने की धमकी दे रहा था। हमले के दौरान उसके राजस्व अभिलेखों को भी फाड़ने का प्रयास किया गया और कुछ दस्तावेजों को नुकसान भी पहुंचा। मामले की गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने लेखपाल की तहरीर पर तीनों आरोपित अधिवक्ताओं के खिलाफ मारपीट, गला दबाने, जान से मारने की धमकी, सरकारी कार्य में बाधा डालने और सरकारी दस्तावेजों को नुकसान पहुंचाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। क्षेत्राधिकारी नामेंद्र कुमार रावत ने बताया कि इस मामले में सभी आरोपों की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।