पड़ाव। काशी प्रदक्षिणा दर्शना यात्रा समिति की ओर से रविवार को व्यास मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन और भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें 500 से ज्यादा श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही एक साल तक चलने वाली काशी प्रदक्षिण यात्रा भी शुरू हो गई।
समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ. अवधेश दीक्षित ने बताया कि यह पहली यात्रा है। इसके बाद 12 महीने में कुल 19 विभिन्न यात्राएं होंगी। ये काशी की पौराणिक यात्राएं हैं। जिन्हें वर्तमान पीढ़ी भूलती जा रही है। काशी प्रदक्षिणा दर्शन यात्रा समिति के सूचना मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य दंडी स्वामी शिवानंद सरस्वती ने सन 1972 में काशी प्रदक्षिणा दर्शन यात्रा समिति की स्थापना की थी, जो 1972 से अनवरत चलने वाली काशी की एकमात्र यात्रा है। उन्होंने बताया कि रविवार को पहली यात्रा वेद व्यासेश्वर महादेव की प्रदक्षिणा से शुरू हुई है। इसके बाद 25 फरवरी को रात 12 बजे काशी के मणिकर्णिका घाट से एक दिवसीय पंचक्रोशी यात्रा, 30 मार्च को नव दुर्गा, नव गौरी प्रदक्षिणा यात्रा, 4 मई को सप्त तीर्थ स्नान, 6 जून को काशी विश्वनाथ वार्षिक कलश यात्रा, 17 जुलाई को केदारेश्वर अंतगृही प्रदक्षिणा यात्रा, 20 जुलाई को काशी के द्वादश ज्योतिर्लिंग प्रदक्षिणा यात्रा होगी। इसी तरह से 27 जुलाई को काशी की त्रिशूल यात्रा, 3 अगस्त को एकादश महारूद्र लिंग प्रदक्षिणा यात्रा, 4 अगस्त को काशी के बैजनाथ धाम जलाभिषेक यात्रा, 31 अगस्त को द्वादश आदित्य प्रदक्षिणा यात्रा, 14 सितंबर को पितर तर्पण दर्शन-पूजन यात्रा, 28 सितंबर को नव दुर्गा व नव गौरी प्रदक्षिणा यात्रा, 26 अक्टूबर को षोडश विष्णु प्रदक्षिणा यात्रा, 8 नवंबर को काशी की वृहद चौरासी कोस परिक्रमा यात्रा, 12 नवंबर को अष्ट भैरव यात्रा होगी। इसके अलावा 7 दिसंबर को सप्तर्षि प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा, 14 दिसंबर को काशी में नवग्रह प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा और 21 दिसंबर को काशी की चार धाम प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा होगी। उन्होंने बताया कि सभी यात्राएं नि:शुल्क हैं। वेद व्यास मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ भंडारे का भी आयोजन किया गया। इस दौरान मृत्युंजय मालवीय, प्रो. सिद्धनाथ उपाध्याय, डॉ. अवधेश दीक्षित, राजेंद्र चौरसिया, अमित सिंह, अमित राय, ज्ञानेंद्र चौबे आदि मौजूद रहे।