चंदौली। पिछले वर्ष खाद के लिए मारे-मारे फिरे किसानों के लिए इस बार भी प्रशासन ने कुछ खास व्यवस्था नहीं की है। सहकारी समितियों पर इस बार भी पर्याप्त खाद नहीं है। किसान अभी से खाद के जुगाड़ में लग गए हैं। जनपद में 13759 मिट्रिक टन खाद के मांग के सापेक्ष मात्र 1727 मिट्रिक टन यानि 12 फीसद खाद ही उपलब्ध है। ऐसे में खेती करते समय किसानों को निजी क्षेत्रों के उर्वरक केंद्रों का सहारा लेना पड़ेगा।
जनपद में कुल 83 सहकारी समितियां और छह से अधिक इफको सेवा केंद्र है। जहां पर उर्वरक की बिक्री की जाती है। सहकारी समितियों पर उर्वरक के उपलब्धता की बात करें तो 8400 मिट्रिक टन यूरिया का लक्ष्य निर्धारित किया गया है पर समिति पर मात्र 820 मैट्रिक टन ही बिक्री केंद्र और बफर स्टॉक में है। डीएपी का 5069 मैट्रिक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है इसमें कुल उपलब्धता 745 मैट्रिक टन है। एमओपी 16 मैट्रिक टन बिक्री केंद्र पर उपलब्ध है, लेकिन इसका लक्ष्य निर्धारित नहीं है। वही एमपी की 290 मेट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन 10 मैट्रिक टन केंद्र पर और 136 मैट्रिक टन का बफर स्टॉक है। निजी उर्वरक के केंद्रों की बात करें तो यूरिया का 22733 का लक्ष्य निर्धारित किया गया जहां कुल उपलब्ध 17170 मैट्रिक टन है इसमें 16338 बिक्री केंद्र पर और 841 मैट्रिक टन बफर स्टॉक है।
उर्वरक की कोई कमी नहीं है। उर्वरक की उपलब्धता सरकारी केंद्रों पर कम है, लेकिन निजी क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। जनपद में जल्द ही सरकारी उर्वरक केंद्रों पर भी पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध होने की उम्मीद है। -बसंत दुबे,जिला कृषि अधिकारी।