पीडीडीयू नगर। जिले के सरकारी अस्पतालों में कुत्ता काटने के बाद लगाई जाने वाली सूई का अभाव है। कुत्ता काटने के बाद एंटी रेबिज इंजेक्शन के लिए मरीज इधर उधर भटक रहे हैं। जिले के दो बड़े अस्पतालों चंदौली और चकिया को छोड़कर सीएचसी और पीएचसी पर इंजेक्शन ही नहीं है। यहां आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। रोजाना तकरीबन 60-70 मरीज बिना इंजेक्शन के घर लौट रहे हैं या फिर बाहर से महंगे इंजेक्शन खरीद रहे हैं।
पीडीडीयू नगर स्थित राजकीय महिला अस्पताल बीस दिनों से एंटी रेबिज इंजेक्शन नहीं है। यहां आने वाले मरीज वापस लौट रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इंजेक्शन की मांग जिला अस्पताल से की गई है। यही हाल सकलडीहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, यहां भी इंजेक्शन के अभाव में प्रतिदिन 10 से 15 मरीज निराश होकर लौट रहे हैं। सीएचसी नौगढ़ पर तीन माह से एंटी रैबिज इंजेक्शन नहीं है। पीएचसी बरहनी पर दो माह से एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। इससे रोज 20-20 मरीजों को वापस लौटना पड़ता है। समय पर इंजेक्शन न लगने पर यह काफी खतरनाक हो सकता है। एंटी रेबिज का डोज न मिलने पर इंसान तक की मौत हो सकती है। सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबिज का डोज फ्री में मिलता है जबकि बाजार में पांच से छह सौ रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
जलिले में चंदौली और चकिया में दो जिला अस्पताल, चार सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 23 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 30 आयुर्वेदिक अस्पताल, 20 हौमियोपैथिक अस्पताल, 248 उप स्वास्थ्य केंद्र, पीडीडीयू नगर में दो अर्बन हेल्थ सेंटर, और 275 निजी अस्पताल है। जिले में प्रतिदिन अस्पतालों में डेढ़ से दौ सौ मरीज एंटी रैबिज डोज लेने पहुंचते हैं लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। जिला अस्पताल चंदौली में प्रतिदिन 20 से 30 मरीज आते हैं। इन्हें इंजेक्शन लगता है। जिला संयुक्त चिकत्सालय चकिया के क्वालिटी मैनेजर डॉ. दिलशाद अली ने बताया कि रैबिज की सुई उपलब्ध है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रेबिज इंजेक्शन की महीनेभर से कमी चल रही है। इसके लिए शासन को डिमांड भेजी गई है। जल्द ही इंजेक्शन उपलब्ध हो जाएगा। डॉ. आरके मिश्रा, सीएमओ