मलेवर गांव में कुएं का दूषित पानी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी पीडीडीयू नगर। जिले में गिरते भूगर्भ जल संकट को दूर करने के लिए 522 अमृत सरोवरों का निर्माण कराया गया है। बावजूद इसके कृषि तथा उद्योगों में भूगर्भीय जल के प्रयोग और पानी की जरूरत पूरा करने के लिए भूगर्भीय जल के चौथे स्तर से पानी के दोहन से जल संकट गहराता जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में प्रति वर्ष आधा मीटर तो मैदानी क्षेत्र में 25 सेमी जल स्तर खिसक रहा है। पर्वतीय वन क्षेत्रों में स्थित विशालकाय बांधों के जलाशय बंधिया ताल पोखरी भूगर्भ जल स्तर को रिचार्ज करने के प्रमुख स्रोत हैं।
मैदानी क्षेत्रों में भी ताल पोखरे तालाब भूगर्भीय जलस्तर को मेंटेन करने में सहायक होते हैं। प्राचीन समय में बने ताल पोखर, तालाब, गढ़िया और पोखरिया पटते जा रहे है। शहरों तथा कस्बों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति जागरूकता का भी अभाव है। इससे भूजल के स्तर को लगातार गिरावट आ रही है। जिले में भूगर्भ जल स्तर को मेंटेन करने के लिए नौ विकास खंडों में 522 अमृत सरोवरों का निर्माण कराया गया है। बावजूद इसके अब तक जल स्तर स्थिर नहीं हुआ है।
जल निगम के अनुसार तीन विकास खंडों में बीते आठ साल में भूजल स्तर करीब दो मीटर तक नीचे चला गया है। 2016 से 2024 के बीच सदर विकास खंड में 1.95 मीटर, चहनिया में 1.08 मीटर और शहाबगंज में 1.62 मीटर की भू जल स्तर में गिरावट पाई गई है। इलाकों में आर्सेनिक युक्त पानी की समस्या बनी हुई है।