फ्रेट कोरीडोर और एनएच-2 योजना में प्रभावित किसानों और प्रशासनिक व रेलवे के अधिकारियों की शनिवार को कलेक्ट्रेट में प्रस्तावित बैठक में सक्षम अधिकारियों की अनुपस्थित से नाराज किसानों ने कार्यालय में मौजूद एडीएम का घेराव किया।
आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं के प्रति जिला प्रशासन संवेदहनहीन है। किसानों ने अधिग्रहित जमीनों के बदले में पांच लाख रुपये मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की। एडीएम शिवकुमार शर्मा ने लोगों को समझाकर वापस किया।
दरअसल फ्रेट कोरीडोर और एनएच-2 योजना में प्रभावित किसानों और लोगों ने विगत 26 दिसंबर को विभिन्न मांगों को लेकर जिलाधिकारी को पत्रक सौंपा था।
किसानों का कहना है कि डीएम ने दो जनवरी को कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक, एनएच और रेलवे के अधिकारियों संग किसानों की वार्ता कराने का आश्वासन दिया था। आज भारी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे।
पता चला कि कार्यालय में कोई भी सक्षम अधिकारी मौजूद नहीं है। एडीएम शिवकुमार शर्मा ही उपस्थित थे। काफी संख्या में किसान डीएम कार्यालय में घुस गए और समस्या के निराकरण की मांग करने लगे।
किसानों का कहना है कि बगैर मांगों को पूरा किए किसानों और गरीब लोगों की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। डीएफसीसीआईएल और परियोजना निदेशक राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा काश्तकारों की कोई भी मांग नहीं मानी जा रही है।
कहा कि 2013 में दी गई धारा 29 और अनुसूची एक और दो को पारदर्शी रूप से लागू किया जाए और पुराने आदेश को निरस्त किया जाए, परियोजनाओं से प्रभावति लोगों को एकमुश्त पांच लाख रुपये दिए जाएं।
किसानों ने कलेक्ट्रेट के बाहर नारेबाजी करते हुए मांगे पूरी नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी। एडीएम ने समस्या को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, शमील मिल्की, श्रवण कुमार, गुलाब चंद्र, सलीम अंसारी, सरवर आलम, महेंद्र प्रसाद, कृष्णकांत आदि उपस्थित रहे।