अरंगी गांव में रामलीला के मंच पर सोमवार की रात डॉ. राम कुमार वर्मा की प्रसिद्ध एकांकी दीपदान का भावपूर्ण मंचन किया गया। इस दौरान कलाकारों ने अभिनय के जरिए चित्तौड़गढ़ के उत्तराधिकारी की रक्षा के लिए पन्ना धाय के साहस, शौर्य और कर्तव्य पालन की जीवंत प्रस्तुति दी।
नाटक की शुरुआत चित्तौड़गढ़ दुर्ग के दृश्य से होती है। पूरी कहानी कुंवर उदय सिंह के कक्ष के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। रात की दूसरी पहर कुछ समूहबद्ध महिलाओं के नृत्य और गीत के स्वर सुनाई देते हैं।
उदय सिंह पन्ना धाय को बताते हैं कि मां तुलजा भवानी के सामने लड़कियां नाच रही हैं और दीपदान कर रही हैं। वह पन्ना को भी नृत्य देखने चलने की जिद करते हैं। पन्ना धाय समझाती है कि चित्तौड़गढ़ के कुलदीपक के तौर पर उसे इस तरह का नाच-गाना देखने नहीं जाना चाहिए।
उसी दौरान अंत:पुर की परिचारिका सोना आकर पन्ना धाय को बताती है कि वनवीर ने सोते हुए राणा विक्रमादित्य के सीने में तलवार भोंककर हत्या कर दी है। उसे आशंका थी कि वह यहां आकर उदय की भी राज्य का उत्तराधिकारी समझ कर हत्या न कर दे।
पन्ना धाय उदय को कीरत बारी की सहायता से टोकरी में रख कर पत्तियों से ढककर महल से बाहर निकाल लेती है और उसकी जगह अपने पुत्र चंदन को सुलाकर चादर से ढक देती है।
राणा विक्रमादिय की हत्या के बाद वनवीर उदय सिंह के कक्ष में आता है और तलवार के प्रहार से उसकी हत्या कर देता है। पन्नाधाय मूर्छित हो जाती है, लेकिन कमरे में दीपक की मंद लौ जलती रहती है। पन्ना धाय की भूमिका हीरा लाल गुप्ता ने निभाई।
वनवीर की अंजनी सिंह, सोना की शिवानी, कुंवर उदय सिंह की बृजमोहन पांडेय, चंदन की ऋषिराज सिंह, कीरत की डॉ धर्मराज बिंद, शामली की कृष्णा, बारी और सैनिक की भूमिका रितेश दुबे और रिंकू सिंह ने निभाई।
कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति देख भाव दर्शक विह्वल हो गए। इस दौरान लीलाधर सिंह, अजीत सिंह, रघुनाथ सिंह, विजय शंकर गुप्ता, गुलाब सिंह आदि रहे। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस भी तैनात रही।