पीडीडीयू नगर। आजादी की 75वें वर्षगांठ के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार की ओर से अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों की दशा में सुधार के लिए शासनादेश जारी किया गया था। इसके तहत जिले के 94 तालाब चयनित किए गए हैं। तालाबों का पुनरुद्धार का कार्य 14 अगस्त तक पूरा कर लिया जाना था। स्वतंत्रता दिवस के दिन 15 अगस्त को सभी सरोवरों पर ध्वजारोहण किया जाना था। बावजूद इसके तय समय सीमा तक अधिकांश तालाबों के किनारे रैंप, पाथवे व शौचालय निर्माण और लाइटिंग आदि कार्य पूरे नहीं हुए।
चयनित 94 अमृत सरोवरों में 79 सरोवर का काम क्षेत्र व ग्राम पंचायत के अंतर्गत आरंभ किया गया। वहीं जिला पंचायत की ओर से करीब आधा दर्जन गांवों में सरोवरों का कार्य आरंभ ही नहीं हो पाया है। कार्य पूर्ण होने के बाद सरोवरों के तट पर व आसपास नीम, पीपल, कटहल, जामुन, बरगद, सहजन, पाकड़ व महुआ आदि के पौधे लगाए जाने थे लेकिन जिला पंचायत की ओर से निर्माण कार्य शुरू नहीं कराए जाने से निश्चित अवधि में सरोवर ही नहीं बन पाए हैं। वहीं कार्ययोजना में चुने स्थान जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिग सिस्टम) को संबद्ध किया गया है। जिन ब्लाकों में भू-जल की मात्रा कम है, वहां सरोवर बनाए जाने को प्राथमिकता दी जानी थी। इन निर्देशों के बावजूद सरोवर का कार्य पूरा नहीं हो पाया है।
चंदौली। मैराथन भाग-दौड़ के बावजूद जनपद में आजादी का अमृत महोत्सव आधे-अधूरे निर्मित अमृत सरोवरों पर मनाया गया। विकासखंड के जसुरी और जगदीशसराय में तीन माह में सरोवरों से जुड़े मात्र 30 फीसद ही कार्य हुए। शेष कार्य अभी किए जा रहे हैं। इसके अलावा निर्मित सरोवरों पर हरियाली लाने और पर्यावरण शुद्ध रखने के उद्देश्य से पौधरोपण करने और झंडा फहराने के लिए बाकायदा चबूतरा भी बनाया जाना था लेकिन ये कार्य समय से पूरे नहीं हुए। संवाद
कंदवा। अरंगी गांव में बन रहे अमृत सरोवर में सीढ़ी, लाइट और रैंप का कार्य तो हो गया है जबकि पाथवे, शौचालय, चेंजिंग रूम व पौधरोपण का कार्य बाकी है। ग्राम प्रधान पूजा सिंह ने बताया कि मनरेगा से करीब 15 लाख और राज्य वित्त से करीब 15 लाख रुपये से अमृत सरोवर का कार्य कराया जा रहा है। तालाब पर लोगों के बैठने के लिए भी बेंच की व्यवस्था की गई है।
नियामताबाद। विकास खंड में कुल 15 अमृत सरोवर को स्वीकृति दी गई है। इसमें नियामताबाद को मॉडल सरोवर का स्वरूप दिया जाना है। हालांकि पहले से ही इस तालाब का सुंदरीकरण कराया जा चुका है। वहीं बौरी, गोधना, हिनौली, मवईकला, सहजौर व महेवा और रंगौली में दो तालाब, गगेहरा, कबीरपुर, मन्नापुर, धरना, गोधना, बरहुली सहित कुल 15 तालाबों का चयन अमृत सरोवर के लिए किया गया है। गोधना में सरोवर किनारे अभी तक बेंच नहीं लगा है। तालाब में पानी भरे होने से सीढ़ी व रैंप का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। गौरी ग्राम पंचायत में बिलारीडिह के शिव मंदिर स्थित सरोवर सीढ़ी का निर्माण शुरू तो हुआ लेकिन वह पूरा नहीं हुआ। ग्राम प्रधान राजू कुमार ने बताया कि जिला पंचायत ने कार्य नहीं कराया तो चारों तरफ पाथवे बनवा दिया गया है।
इलिया। कस्बा स्थित रानी लक्ष्मीबाई अमृत सरोवर की सीढ़ी और रैंप बनाकर छोड़ दिया गया है। तालाब में न तो पानी है और न ही आने-जाने के लिए पाथवे बनाया गया है। आधा-अधूरा पाथवे केवल मिट्टी से बना दिया गया है। इससे बरसात के दिनों में तालाब तक पहुंचने में कठिनाई होती है। खिलची गांव में चयनित तालाब पर शौचालय और पौधरोपण का कार्य बाकी है। बरांव गांव के अमृत सरोवर में रैंप, पाथवे व सीढ़ी का निर्माण पूरा है जबकि अन्य कार्य अधूरे हैं। संवाद
अमृत सरोवर के लिए चयनित किया गया था। 15 अगस्त तक इनके कार्य पूरे करा लिए जाने थे। इन सरोवरों पर स्वतंत्रता दिवस के दिन ध्वजारोहण भी किया गया है। शेष तालाबों को अमृत सरोवर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
-संजीव कुमार सिंह, जिलाधिकारी।