संसद में दीवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) विधेयक पर चर्चा के दौरान बुधवार को चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कहा कि यह कानून बड़े कॉर्पोरेट घरानों को राहत देने का जरिया बन गया है। गरीब और मेहनतकश लोगों की गाढ़ी कमाई आज भी चिटफंड और निवेश कंपनियों में फंसी हुई है।
सांसद ने कहा कि चंदौली समेत पूर्वांचल के कई जिलों में विभिन्न कंपनियों ने गांव-गांव एजेंटों को भेजकर लोगों को ऊंची ब्याज दर और दोगुना मुनाफा देने का लालच देकर हजारों करोड़ रुपये का निवेश कराया। आज वे कंपनियां दिवालिया हो चुकी हैं, लेकिन निवेशकों को उनका पैसा वापस दिलाने में सरकार की कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। उन्होंने सरकार के उस जवाब पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि कंपनियों की संपत्तियां बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाया जाएगा। सांसद ने कहा किसंपत्तियां बेचकर जुटाई गई राशि सीधे निवेशकों के खातों में देने के बजाय सहकारिता विभाग के बैंकों में जमा कर दी गई है, जिससे लोगों को जटिल कागजी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें उचित ब्याज भी नहीं मिल रहा है। व्यंग करते हुए उन्होंने कहा कि पैसा तो आया, लेकिन ऐसी जगह पहुंच गया जहां से उसे निकालना बेहद कठिन हो गया है। सांसद ने कहा कि लाखों गरीब परिवार अपनी जीवनभर की कमाई के लिए भटक रहे हैं, जबकि सरकार संवेदनहीन बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर जिला स्तर पर व्यापक आंदोलन करेगी। संवाद