पूर्व मध्य रेलवे के लोको मंडलीय अस्पताल पर 80 हजार लोगों के इलाज का जिम्मा है। जबकि यहां बीस हजार रेलकर्मचारी हैं। यहां सुबह नौ बजे पंजीकरण काउंटर खुला और मरीज पहुंचने लगे, लेकिन डाक्टरों का पता नहीं था। साढ़े नौ बजे डाक्टरों के कक्ष खुलने लगे और झाड़ूू लगाने का सिलसिला शुरू हुआ। जबकि ओपीडी का समय सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक का है। सुबह दस बजे डॉ. संजय आर्या पहुंचे और इनडोर की जांच के बाद आउटडोर में पहुंचे। तब मरीजों को देखना शुरू हुआ। इसी समय सीएमएस डॉ. वीके दुबे, डॉ. आरपी सिंह आदि अस्पताल पहुंचे और काम शुरू किया। इसके पहले मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते रहे।
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अस्पताल परिसर में है गंदगी
मुगलसराय। 128 बेड वाले मंडलीय लोको चिकित्सालय में गंदगी का अंबार दिखता है। वार्ड और ओपीडी में तो प्रतिदिन झाडू लगती है और पोछा लगाकर फर्श को चमकाया जाता है, लेकिन ओपीडी वार्ड के शौचालय की साफ सफाई नहीं होती है। स्थिति यह है कि वह इस्तेमाल लायक नहीं रह गया है। इसी तरह प्रवेश द्वार के ठीक पीछे पानी बहता रहता है। वार्ड के बगल में झाड़-झंखाड़ उगे हैं, और इसमें विषैले जंतुओं का बसेरा बनता जा रहा है।
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खराब पड़ी है अल्ट्रा साउंड मशीन
मुगलसराय। बीस हजार रेलकर्मियों की क्षमता वाले पूर्व मध्य रेलवे के मुगलसराय मंडल के सबसे बड़े अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। एक्स रे मशीन भी पुरानी हो चुकी है। और तो और कंडम घोषित हो चुकी अल्ट्रा साउंड मशीन भी एक्स रे कक्ष में कूड़े की तरह रखी हुई है।