दुलहीपुर स्थित सनबीम स्कूल में आयोजित स्पक मैके में गुरुवार को विख्यात भरत नाट्यम नृत्यांगना पद्मश्री गीता चंद्रन ने अपने नृत्य कौशल से लोगों केे मंत्रमुग्ध किया। इस दौरान उन्होंने भरतनाट्यम के महत्व को भी समझाया। कहा कि भरत नाट्यम कविता, नाट्य, नृत्य और संगीत का समन्वय है।
शास्त्रीय नृत्यांगना ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’, आदिशंकराचार्य द्वारा रचित ‘शिवपंचाक्षर-स्त्रोत’ और महान कृष्ण साधिका मीराबाई द्वारा रचित पद ‘म्हाने चाकर राखो जी’ पर नृत्य प्रस्तुत कर सभी को भाव विभोर कर दिया। उनके साथ गायन एस शंकर, नट्टुवंगम, ज्योति श्री देवी ने की जबकि मनोहर बलाट चमडिराने ने मृंदगम पर, श्रीनिवास ने वायलन पर, कु मधुरा भ्रुसुंड ने नृत्य में उनके साथ संगत की। इसके पूर्व भरतनाट्यम की विशेषताओं और छात्रों की जिज्ञासाओं का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि आंतरिक भावाभिव्यक्ति का नाम ही नृत्य है। भाव, राग और ताल का अद्भुत समन्वय ही भरतनाट्यम को अन्य शास्त्रीय नृत्यों से उसे अलग पहचान दिलाता है। नृत्य एक कला है, सतत् अभ्यास से ही इसे सीखना संभव है। उन्होंने विद्यालय के छात्र-छात्राओं को भरतनाट्यम की बारीकियों और सही भाव भंगिमाओं से भी परिचित कराया। इस अवसर पर ‘स्पिक मैके’ वाराणसी परिक्षेत्र के संयोजक एसपी सिंह ने कार्यक्रम की सराहना की। इस अवसर पर विद्यालय के सचिव यदुराज कानूडिया, डायरेक्टर श्वेता कानूडिया, शैक्षिक सलाहकार जेपीसी पाठक, उपप्रधानाचार्या स्मृति खन्ना आदि रहे। धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय के प्रधानाचार्य सीके पालित ने किया।