जिले में मोंथा तूफान का असर चार दिनों तक रहा। इस बीच हवा के साथ 82.4 मिमी बारिश हुई। बेमौसम बारिश से किसानों कहीं धान की फसल गिर गई तो कहीं पानी भर गया, लेकिन बारिश बंद होने के 48 घंटे बाद भी फसल नुकसान का विभाग आकलन नहीं लगा सका।
जिले के किसान खरीफ सीजन में मुख्य रूप से धान और रबी सीजन में गेहूं की खेती करते हैं। खेतों में धान की फसल तैयार है बहुत से जगहों पर कटाई भी शुरू हो चुकी थी, लेकिन बीते सोमवार की रात से मोंथा तूफान की वजह से शुरू हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। लगभग चार दिनों तक हवा के साथ रुक- रुक कर 82.4 मिमी बारिश हुई। किसान शिवलाल यादव, उमराज, प्रेमचंद ने बताया कि चार- पांच दिनों तक धान भीगने से दानों के काला होने और सड़ने की संभावना है। इससे उत्पादन पर भी काफी असर पड़ेगा। नमी के कारण दाने खराब हो जाएगे। इससे उन किसानों को ज्यादा परेशानी हो जो क्रय केंद्रों पर अपना धान बेचते हैं। जिनकी फसल डूब गई है उनका तो सबसे ज्यादा नुकसान होगा। बारिश खत्त्म हुए 48 घटे का समय बीत गया है लेकिन कृषि विभाग यह आकलन नहीं कर पाया है कि इससे जिले के कितने किसानों का नुकसान हुआ है। केवल दस प्रतिशत फसल गिरने की बात कही जा रही है। डॉक्टर गगनदीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी ने बतायाकि हवा और बारिश से जिले में लगभग दस प्रतिशत धान की फसल गिर गई है। नुकसान के आकलन के लिए सभी एडीओ कृषि और बीमा कंपनी के कर्मचारियों को लगाया गया है। सर्वे के बाद बीमित किसानों को क्षतिपूर्ति दी जाएगी।