जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता सिंह ने शपथ ग्रहण के बाद गुरुवार को जिला पंचायत कार्यालय सभागार में सदस्यों के साथ पहली बैठक की।
इस
दौरान पिछली बैठक की कार्रवाई और नई कार्ययोजनाओं पर चर्चा की गई। इस
दौरान निर्माण कार्य समिति में पूर्व अध्यक्ष छत्रबली सिंह को शामिल करने
पर हंगामा भी हुआ। सदस्यों ने आरोप लगाया कि समितियों के गठन में मनमानी
की गई है।
अंत में इस शर्त पर समितियों का गठन हुआ कि समिति के कार्य नहीं
करने पर सदस्यों को बदल दिया जाएगा। सदस्यों के निशाने पर जलनिगम, सिंचाई
विभाग और बिजली विभाग के अधिकारी रहे।
जिला पंचायत की पहली बैठक में
सबसे पहले पुरानी बैठकों की कार्यवृत्ति पढ़कर सुनाई गई। इसके बाद छह
समितियों के गठन पर चर्चा की गई। निर्माण कार्य समिति में शामिल सदस्यों के
नामों की जैसे ही घोषणा की गई।
पूर्व सांसद रामकिशुन यादव के भतीजे और
सदस्य मुलायम सिंह यादव ने सदस्यों के नामों पर आपत्ति दर्ज की। कहा कि
समिति में सदस्यों का नाम सभी जिला पंचायत सदस्यों की सहमति से डालना
चाहिए।
उन्होंने समिति में सभापति छत्रबली सिंह के स्थान पर अनिल सिंह का
नाम शामिल करने का सुझाव रखा, जिस पर भाजपा और बसपा के सदस्यों ने असहमति
जताई।
इस मुद्दे पर थोड़ी देर हंगामा भी हुआ। अंत में यह निर्णय लिया गया
कि समिति का गठन इस शर्त पर हो कि समिति के सही कार्य न करने पर उसे भंग
कर नए सदस्य बनाए जाएंगे।
बैठक के दौरान सदस्यों ने खराब ट्रांसफारमरों को
बदलने, हैंडपंप रीबोर, विद्यालयों में बाउंड्रीवाल का निर्माण संबंधी
मुद्दा उठाया। अधिकांश सदस्याएं इन्हीं विभागों से जुड़ी थीं।
सदस्यों ने
बोर्ड की बैठक में प्रमुख अधिकारियों के नहीं रहने की भी शिकायत दर्ज
कराई।