सर्वशिक्षा अभियान के तहत परिषदीय विद्यालयों में नि:शुल्क बांटी जा रही पाठ्य पुस्तकों में तमाम गड़बड़ियां सामने आई हैं।
किताबों
की खराब छपाई की शिकायत तो आम है, लेकिन जब पुस्तक के बीच से पाठ ही गायब
हों, तो बच्चे कैसे पढ़ेंगे। पूर्व माध्यमिक विद्यालय रैपुरा में सातवीं
कक्षा के छात्रों में वितरित की गई मंजरी नामक पुस्तक में तीन पाठ ही नहीं
हैं। प्रकाशक और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से छात्र और
अभिभावक ही नहीं अध्यापक भी हैरान हैं।
सरकार शिक्षा को बढ़ावा देन के
लिए अनेक जतन कर रही है।
प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में मुफ्त
शिक्षा के साथ नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, मिड डे मील, वजीफा आदि दिया जा रहा
है। इन सब कारणों से बच्चों की संख्या भले ही बढ़ी हो, लेकिन उनकी शिक्षा
पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एमडीएम और स्कूली ड्रेस वितरण में तो
अनियमितता आती ही रहती थी, अब किताबों में भी गड़बड़ियां सामने आने लगी
है।
पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में सातवीं के विद्यार्थियों को हाल ही में
निशुल्क पाठ्य पुस्तकें बांटी गई है। जिसमें मंजरी पुस्तक से बच्चों को
हिंदी पढ़ाई जाती है। इसमें 21 पाठ तक हिंदी और सात पाठ संस्कृत के हैं।
पूर्व
माध्यमिक विद्यालय रेपुरा में वितरित की गई पुस्तक सीरीज नंबर एफ
1701760008090 में चार पाठ के बाद आठवां पाठ शुरू हो गया है।
विषय सूची में
दी गई भारतेंदु हरिश्चंद्र की कविता निज भाषा उन्नति, रमेश उपाध्याय की
कहानी शाप मुक्ति, सूरदास, रसखान की कविता बाललीला और भक्तिपद के पाठ गायब
हैं।
यही नहीं आठवीं से दसवीं तक का पाठ दुबारा छाप दिया गया है। नेशनल
प्रिंटर्स रांची से प्रकाशित इस पुस्तक की 55 हजार 480 प्रतियां प्रकाशित
हुई हैं प्रदेश के स्कूलों में बांटने के लिए। विभागीय सूत्रों की मानें
तो छपाई में त्रुटि हो सकती है, लेकिन इसकी जांच परख कर स्कूलों में
बंटवाने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है। ऐसे में बगैर जांच के बच्चों
के हाथों में किताब का पहुंचना साफ लापरवाही है।
इस संबंध में बेसिक
शिक्षा अधिकारी फूलचंद यादव ने कहा कि सभी किताबें गड़बड़ नहीं हैं। रैपुरा
विद्यालय पर आई किताबों की त्रुटियों की जांच करायी जाएगी।
इनसेट-
बीस हजार बच्चे हैं सातवीं कक्षा में
मुगलसराय।
जिले में 470 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 56 हजार 816 छात्र-छात्राएं
अध्ययनरत हैं। इसी तरह नौ कस्तूरबा विद्यालयों में नौ सौ छात्राएं शिक्षा
ग्रहण कर रही हैं। लेकिन शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार सातवीं कक्षा
में करीब बीस हजार बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। खास बात यह है कि जिले
में नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें अलग अलग सीरीज में बांटी गई हैं। यही कारण है
कि सभी किताबों में त्रुटियां नहीं हैं, लेकिन आधे से अधिक किताबों से
तीन पाठ गायब बताए जाते हैं।