शहाबगंज। क्षेत्र के बायापुर गांव स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के पास एकेडिमिक और हॉस्टल के निर्माण को रोकने के बाद मंगलवार को ठेकेदार ने घटिया ईटों को वाहन पर लादकर भट्ठे पर वापस भेज दिया। वहीं कार्य स्थल से भस्सी, सीमेंट और ईंटों के सैंपल लैब में जांच के लिए भेजा गया। सोमवार को एसडीएम चकिया ने कार्य स्थल का निरीक्षण किया था। कार्य मानक के विपरीत होने पर काम रुकवा दिया था।
क्षेत्र के बयापुर में स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय को उच्चीकृत कर पौने दो करोड़ की लागत से यहां एकेडमिक भवन और हास्टल भवन का निर्माण किया जा रहा है। यहां 100 छात्राओं को रहने खाने से लेकर पढ़ने तक की सुविधा निशुल्क प्रदान की जाएगी। निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग की शिकायत के बाद सोमवार को चकिया एसडीएम प्रेमप्रकाश मीणा ने कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण में अनेक खामिया मिली। जांच के दौरान दोयम दर्जे का ईट के प्रयोग होता मिला। बुनियाद में मानक के विपरीत कार्य हुआ मिला। वहीं बालू की जगह भस्सी व सीमेंट भी घटिया क्वालिटी का प्रयोग होता मिला। नींव में पीसीसी भी नहीं किया गया। बड़े पैमाने हो रहे भ्रष्टाचार को देख कर एसडीएम ने काम रोक दिया। मंगलवार को कार्य स्थल से भस्सी, सीमेंट और ईट के सैंपल लेकर जांच के लिए बीएचयू व कानपुर लैब में भेजा गया। इस कार्रवाई से हास्टल का निर्माण करा रही संस्था के कर्मचारियों में हड़कम मच गया। मंगलवार को कार्य स्थल पर पहुंचे ठेकेदार ने सभी ईटों का लदवाकर वापस भट्टे पर भेज दिया। एसडीएम ने बताया कि मानक विहीन भवन बनने के बाद बालिकाओं के साथ अनहोनी घटना हो सकती थी। कहा कि कार्य बंद करा दिया गया है और मामले की जांच कराई जा रही है। ठेकेदार को बुनियाद उखाड़ कर फिर से मानक के अनुसार कार्य कराने को कहां गया है। जरूरत पड़ने पर कार्यदायी संस्था व ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।