गंगा का पानी भले ही घटाव पर हो, पर जिले की छोटी नदियों में उफान आ गया है। इसके चलते जहां हजारों एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई है, वहीं मुख्य मार्गों पर पानी भर गया है। इसके चलते आवागमन ठप है। बाढ़ का पानी अब लोगों के घरों में घुसने लगा है। इससे कई लोगों के कच्चे मकान गिर गए हैं। जिलाधिकारी कुमार प्रशांत ने बताया कि बांधों में जल संग्रहण संचयन का स्तर ठीक रखने के लिए नदियों में पानी छोड़े जाने से खेत भर गए हैं। शीघ्र ही जल निकासी की व्यवस्था हो जाएगी और पानी निकाल दिया जाएगा।
गंगा का पानी घटने के बाद अब गरई, चंद्रप्रभा और कर्मनाशा नदियों का जलस्तर काफी तेजी से बढ़ा है। नदियों पर बने बांधों के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद जलस्तर को ठीक रखने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा बांधों से नदियों में पानी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते इन नदियों के किनारे बसे गांवों और मुख्य मार्गों पर पानी भर गया है। गरई नदी का जलस्तर बढ़ने से बबुरी क्षेत्र के चोरमरवां, चंदाईत, खुरुहुजा, बरउर और चंद्रप्रभा नदी का जलस्तर बढ़ने से भगतपुरा, खरीद, भैसहीं, करेमुआ, जरखोर सहित दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ का पानी खुरूहूजा गांव में कई लोगों के घरों में पानी घुस गया है। इसके चलते गांव निवासी रामविलास और रामा यादव का कच्चा मकान धराशाई हो गया। वहीं कंदवा क्षेत्र के अंरगी, धनाईतपुर, मुड्डा, चिरईगांव, चारी, अदसड़, ककरैत आदि गांवों में कर्मनाशा नदी का पानी भर गया है। कंदवा-अरंगी मार्ग पर भी करीब चार फीट पानी भर गया है। इसके चलते आवागमन ठप हो गया है। लोगों ने जिला प्रशासन से नाव भेजने की मांग की है।