पीडीडीयू नगर। स्कूली वाहनों के लिए अभिभावकों से मोटी फीस लेने के बाद भी कान्वेंट स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। बच्चों को स्कूल लाने ले जाने के लिए कई अनफिट वाहन भी काम में लिए जा रहे हैं। इसमें कई छोटे वाहन भी हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पंजीकृत वाहनों में अभी भी 150 स्कूली वाहनों की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है। विद्यालय प्रबंधन की ओर से बरती जाने वाली यह लापरवाही कभी भी भारी पड़ सकती है।
जिले में छोटे व बड़े स्कूल प्रबंधकों की ओर से बच्चों को घर से स्कूल लाने व ले जाने के नाम पर अभिभावकों से काफी मोटी रकम वसूली जाती है। इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन की ओर से वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र लेने में कोताही बरती जा रही है। जिले के एआरटीओ कार्यालय में कुल 813 छोटे-बड़े स्कूली वाहन दर्ज हैं। इसमें बड़ी बस, मिनी बस, मैजिक समेत अन्य गाड़ियां पंजीकृत हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अभी तक विभिन्न स्कूलों के 150 वाहनों के पास फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं है। जबकि विभाग की ओर से ऐसे स्कूलों को लगातार नोटिस भेजने की कार्रवाई की जा रही है। एआरटीओ प्रशासन रमेश चंद श्रीवास्तव ने बताया कि अनफिट वाहनों से संबंधित स्कूल प्रबंधकों को नोटिस भेजा जा रहा है। वहीं डीआईओएस व अन्य अधिकारियों के माध्यम लगातार जांच कराकर प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाबत सूचित भी कराया जा रहा है। इसके अलावा जिला स्तर पर परिवहन सुरक्षा समिति की बैठक भी कराई जाती है।
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विक्रम और ई- रिक्शा से भी स्कूल जाते हैं बच्चे
पीडीडीयू नगर। बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई बार अभिभावकों की ओर से भी लापरवाही बरती जाती है। अभिभावकों की ओर से छोटे- छोटे बच्चों को ई- रिक्शा और विक्रम से स्कूल भेजा जाता है। इन वाहनों में बच्चे भूसे की तरह ठूंस कर बैठाए जाते हैं। इसको लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी लापरवाह बने रहते है। संवाद