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बोले छात्र व अभिभावक, परीक्षा से ही होता सही आकलन

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पीडीडीयू नगर। कोरोना महामारी को लेकर 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई थी। लॉकडाउन दो माह बीत जाने के बाद भी जारी है। इस दौरान सरकार ने सभी स्कूलों व कोचिंग सं्स्थाओं को बंद करने का निर्देश जारी किया था। इस वजह से अभी भी स्कूल बंद ही हैं। ऑनलाइन पढ़ाई भले ही हो रही है मगर कक्षाएं नही चलने से बच्चों की पढ़ाई पर दिक्कत बढ़ती जा रही है। सरकार ने बच्चों से बिना परीक्षा लिए ही उन्हें प्रोन्नत कर अगली कक्षा में प्रवेश (जनरल प्रमोशन) दिए जाने का फैसला को लेकर बच्चों, उनके अभिभावकों व शिक्षकों में भी खूब चर्चा हो रही है।
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देश में लॉकडाउन उस समय लगाना पड़ा तब छात्रों की वार्षिक परीक्षा चल रही थी। हालांकि कुछ स्कूलों में परीक्षा समाप्त हो चुकी थी पर अधिकांश में बच्चे परीक्षा दरे रहे थे। लॉकडाउन लगने के बाद एकदम से स्कूलों को बंद कर दिया गया और कक्षा एक से आठवीं और नौ तथा ग्यारहवीं के बच्चे घरों में बैठ गए। बच्चे, अभिभावक व शिक्षक स्कूलों के खुलने का इंतजार करते रहे पर लॉकडाउन की समय सीमा बढ़ती रही। इससे बच्चे परीक्षा न देने के साथ ही अगली कक्षाओं में प्रवेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब जबकि सरकार ने बच्चों को बिना परीक्षा के अगली कक्षाओं में प्रवेश देने का निर्णय ले लिया है तो इसपर चर्चा शुरू हो गई है। मेधावी बच्चों और उनके अभिभावकों का कहना है कि ऐसा किए जाने से उनके साथ अन्याय होगा। वहीं पढ़ाई में कमजोर बच्चों और उनके अभिभावकों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। शिक्षकों का भी इस विषय पर भिन्न-भिन्न विचार हैं।
परीक्षाएं न होने से कमजोर व मेधावी छात्रों के मूल्यांकन में कठिनाई होगी। वहीं बिना परीक्षा दिए उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थी अपना सही मूल्यांकन नहीं कर पाएंगे। राज पांडेय, शिक्षक।
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परीक्षाओं से ही किसी भी विद्यार्थी का सही आकलन हो सकता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि प्रमोट करने के बजाय पढ़ाए गए कोर्स के आधार पर परीक्षाएं हो। सिमरनप्रीत कौर।
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बिना परीक्षा दिए अगली कक्षा में प्रवेश मिलने से प्रतियोगिता की भावना में कमी आएगी। साथ ही वर्ष भर की मेहनत का मूल्यांकन भी ठीक से नहीं हो पाएगा। सभी को एक समान नंबर दिए जाने से पता ही नहीं चलेगा कि किसने कितनी पढ़ाई की है। प्रियांशु जायसवाल
कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह फैसला उचित जान पड़ता है। यदि ऐसा न किया जाता तो छात्रों के वर्ष भर की मेहनत पर पानी फिर जाता। हालांकि यह फैसला कुछ छात्रों को नागवार लग सकता है लेकिन अधिकांश छात्रों, विशेषकर गरीब तबके के छात्रों को इससे फायदा होगा। अनुराग यादव।
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