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Chandauli News: स्टेशन मास्टर की पुत्री मुस्कान तीसरे प्रयास में बनीं आईएएस, जिले का नाम किया रौशन

Tue, 22 Apr 2025 07:32 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली

सार

स्टेशन मास्टर की पुत्री मुस्कान आईएएस बनी है और जिले का नाम रौशन किया है। इस सूचना के बाद पूरे नगर में उत्सव का माहौल है। सभी बेटी को बधाई दे रहे हैं।
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मुस्कान - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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चंदौली के रेमा गांव स्थित एक अपार्टमेंट में रहने वाले रेलवे में स्टेशन मास्टर देवकुमार की पुत्री मुस्कान गुप्ता ने यूपीएससी की परीक्षा में 302वीं रैंक प्राप्त कर आईएएस बनी हैं। आईएएस की परीक्षा पास कर उन्होंने जिले को गौरवान्वित किया है। अनूठी बात यह है कि इसी अपार्टमेंट में रहने वाली कीर्ति त्रिपाठी ने पिछले वर्ष आईएएस की परीक्षा पास कर जिले का नाम रौशन किया था। मुस्कान का यह तीसरा प्रयास था। 
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फतेहपुर में स्टेशन मास्टर देवकुमार गुप्ता की पुत्री मुस्कान ने सनबीम मुगलसराय से इंटरमीडिएट की परीक्षा 96 प्रतिशत अंकों के साथ पास कर अव्वल स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद ग्रेजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से 2021 में पूर्ण कर वे सिविल परीक्षा की तैयारी में लग गई थी।

अपने तीसरे प्रयास में मुस्कान को यह सफलता समाजशास्त्र वैकल्पिक विषय के साथ मिली है। मुस्कान ने अपनी सफलता का श्रेय ईश्वर के साथ माता-पिता, चाचा-चाची, परिवारजनों और गुरुजनों के आशीर्वाद को दिया है। लगातार दो वर्षों में मिली इस दोहरी सफलता से अपार्टमेंट के निवासियों में हर्ष का माहौल है।
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अपार्टमेंट के अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने बताया कि यह दोहरी खुशी इसलिए भी है कि एक तो बिटिया ने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है और दूसरे यह अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत का काम करेगी। मुस्कान की इस उपलब्धि पर राजेश सिंह सोनू, साकेत सिंह, पीके सिंह, कीर्ति त्रिपाठी (आईपीएस) के पिता उपेंद्र त्रिपाठी, बिमलेश सिंह, विवेक सिंह आदि ने बधाई दी है।


कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से पाई सफलता
मुस्कान के पिता देवकुमार गुप्ता ने बताया कि मुस्कान ने इससे पहले भी दो बार प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। दो बार की असफलता के बाद भी उसने हार नहीं मानी और उसका हौसला घटने के बाद पहले से भी ज्यादा बढ़ा। अपनी असफलता की मंथन की और जो कमियां थी उसको कड़ी मेहनत कर दूर किया। यह सफलता उसकी मेहनत की देन है। विशेष किसी कोचिंग आदि का सहारा नहीं लिया। घर पर ही पढ़ाई की। 
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