क्षेत्र के मारुफपुर रामशाला में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान
यज्ञ का प्रारंभ सोमवार को हुआ। जिसके शुभारंभ के पहले एक सौ आठ किशोरियों
द्वारा कलश यात्रा निकाली गई।
यात्रा मारुफपुर रामशाला से
घंटा-घड़ियाल और वाद्य यंत्रों के साथ सैदपुर तिरगावां गंगा घाट से जल भरकर
पुन: यज्ञ स्थल पर स्थापित की गई।
श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन
व्यास रमाकांत पांडेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रीमद् भागवत कथा भारतीय
संस्कृति की धरोहर है। इसके अध्ययन एवं उसके उद्देश्यों को आत्मसात करने
से व्यक्ति हर प्रकार के क्लेशों से दूर हो सकता है। इस नश्वर संसार में हर
व्यक्ति सुख-शांति के लिए अनेक प्रकार के कार्य करना चाहता है, लेकिन
सुख-शांति मात्र गीता में दिये गए उपदेशों का अनुसरण करने से प्राप्त किया
जा सकता है। कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भगवान के श्रीमुख से निकली एक
अमृतवाणी है।
कहा कि व्यक्ति को इस संसार में अपने को किस प्रकार से
प्रस्तुत करना चाहिए। यह सब श्रीमद्भागवत में वर्णित है। इसलिए मनुष्य को
श्रीमद् भागवत का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। कथा के दौरान अमरनाथ, सूबेदार
मिश्र, जयशंकर मिश्र, दुर्गेश, प्रधान राजवंश सिंह, संजय सिंह,
सम्पूर्णानंद आदि रहे।