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पूर्वांचल के 1200 श्रमिकों को लेकर पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन

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पीडीडीयू रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद बेटे का हाथ पकड़कर घर के लए जाता व्यक्ति। - फोटो : CHANDAULI
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पीडीडीयू नगर। कोरोना वायरस संक्रमण के फैलाव को रोकने के के लिए देश में लागू लॉकडाउन में गुजरात के सूरत में फंसे 1209 श्रमिकों को लेकर सूरत पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन श्रमिक स्पेशल ट्रेन शुक्रवार की शाम स्थानीय स्टेशन पर पहुंची। यहां अधिकारियों की निगरानी में श्रमिकों को रोडवेज की 50 बसों से श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचाया गया। इस दौरान स्टेशन पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम रहे।
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कोरोना वायरस के चलते देश में 17 मई तक लॉकडाउन लागू है। ऐेसे में देश के विभिन्न औद्योगिक इलाकों में यूपी, बिहार सहित अन्य राज्यों के श्रमिक फंसे हुए हैं। एक मई से गृह मंत्रालय के निर्देश पर श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से श्रमिकों को घर वापस भेजा जा रहा है। प्रदेश सरकार की पहल के बाद पूर्वांचल के चंदौली के साथ बलिया, जौनपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, फतेहपुर, कानपुर, सुत्तानपुर सहित विभिन्न जनपदों के 1209 श्रमिकों को लेकर स्पेशल ट्रेन शुक्रवार की शाम साढ़े पांच बजे पहुंची। हालांकि इसके पहले ही श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए 50 बसें सर्कुलेटिंग एरिया में खड़ी कर दी गई। शाम चार बजते बजते डीएम नवनीत सिंह चहल, एडीएम संजय कुमार, एसडीएम कुमार हर्ष सहित जिला स्तरीय अधिकरियों की टीम स्टेशन पर पहुंच गई। रेलवे की ओर से डीआरएम पंकज सक्सेना, वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त आशीष मिश्र, आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव कुमार सहित अन्य लोग सुरक्षा में मुस्तैद रहे। प्लेटफार्म पर यात्रियों को खड़ा होने के लिए गोल घेरा बनाया गया। हालांकि स्टेशन पर पत्रकारों को जाने से रोक दिया गया। टिकट काउंटर पर जिले के नाम लिखकर चिपकाए गए। प्लेटफार्म से बाहर आने के लिए सुरक्षा घेरा बनाया गया। ट्रेन पहुंचते ही एक एक बोगी से बारी बारी से यात्रियों को नीचे उतारा गया। इसके बाद थर्मल स्क्रीनिंग के बाद एआरएम मुकेश कुमार सिंह, रामलखन पाल और रामवृक्ष की देख रेेख में सभी को निर्धारित बसों में भेजा गया।
कैसे बीते 42 दिन यह हमारा दिल ही जानता है...
जिले के मझवार रामगढ़ निवासी धीरज सिंह ने बताया कि वह सूरत में टेक्सटाइल्स मिल में काम करता था। पिछले एक वर्ष से वह रहा था। पत्नी मधु सिंह, बच्चे प्रिया और प्रांजल के साथ जिंदगी अच्छे से चल रही थी। अचानक लॉकडाउन लागू हो गया और फैक्टरी बंद हो गई। कुछ दिन तो कमाए पैसे चले लेकिन इसके बाद आर्थिक तंगी आ गई। घर से पैसे मंगाने की नौबत आ गई। इस बीच घर वापसी के बारे में पता चला तो आनलाइन फार्म भर दिया और यहां पहुंच गया। टेक्सटाइल्स मिल में ही काम करने वाले बहेरा चंदौली निवासी नीरज सिंह ने कहा कि भैया आशीष सिंह सूरत में रहते थे। ऐसे में भी कमाने के लिए दो माह पहले गया। बीस दिन काम शुरू किया था कि लॉकडाउन लागू हो गया। ऐसा दिन किसी को न देखना पड़े। अब मैं यही काम करूंगा। जिले के अमादपुर निवासी और सूरत में डायमंड कटिंग का काम करने वाले प्रदीप सिंह सूरत में पाचं वर्षों से रहे है। पत्नी जया सिंह और चार वर्ष के बेटे आदर्श के साथ जिंदगी अच्छे से चल रही है। इस बीच लॉकडाउन में अचानक वे बेरोजगार हो गए। किसी तरह कर्ज लेकर वे वापस लौटे हैं।
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630 रुपये का टिकट और यात्रा करने वालों से वसूले आठ सौ से नौ सौ रुपये
पीडीडीयू नगर। देश में लॉकडाउन की सबसे अधिक मार मजदूरों पर पड़ी है। काम धंधे बंद होने की वजह से पैसे खत्म हो गए, मांग कर खाने की नौबत आ गई। ऐसे में जब मजदूरों को घर वापसी का मौका मिला तो रेलवे ने उनसे किराए के पैसे वसूले। इसमें भी किराए से अधिक वसूले गए। वहीं बीस घंटे के सफर के दौरान उन्हें मात्र एक बार खाना मिला और एक बोतल पानी। ऐेसे में वे भूख प्यास से बेहाल हो गए। सूरत से श्रमिक स्पेशल ट्रेन से लौटे यात्रियों के चेहरे पर घर वापसी की खुशी तो दिखी, लेकिन रेलवे की निर्ममता से वे नाराज भी रहे।
फतेहपुर निवासी रेनू सिंह ने बताया कि सूरत में काम बंद होने से उनके सामने भुखमरी की स्थिति हो गई। कई बार घर वापसी की मांग की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जब पैसे खत्म हो गए तब आनलाइन घर वापसी का मैसेज मिला। 630 रुपये टिकट के बदले आठ सौ रुपये वसूले गए। लालती ने बताया कि पूरे रास्ते में जिस स्टेशन पर ट्रेन रुकती, उतरने नहीं दिया जाता और सुरक्षा के इंतजाम रहते। ऐसे में खाना पानी खरीद भी नहीं सके। सुल्तानपुर जा रहे घनश्याम ने बताया कि पहले गुजरात में तमाम समस्याएं झेली और अब रेलवे ने झेला दिया। जोगेन्द्र ने बताया कि वे धागा फैक्टरी में काम करता है। लॉकडाउन में फैक्टरी पर ताला लग गया। एक माह तो कंपनी की तरफ से खाना मिला, बाद में मालिक ने खाना देना बंद कर दिया। मांग कर खाने की नौबत आ गई। इस बीच वापस आने का मौका मिला तो कुछ परिचितों से कर्ज लेकर टिकटखरीदे और वापस लौटा हूं।
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