चंदौली के धानापुर में 1 मई को हुई बस मालिक राजकुमार यादव उर्फ मुट्टन की गोली मारकर हुई हत्या मामले में रविवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर ट्वीट कर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने लिखा किया कि मुख्यमंत्री जी लखनऊ की जगह चंदौली को राजधानी घोषित कर दें और जहां जाना हो चले जाएं लेकिन उप्र की जनता को यूँ माफ़ियों की गोलियां खाने के लिए न छोड़ें।
उत्तर प्रदेश में 'महा-अन्यायराज' का दौर चल रहा है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लिखा कि प्रदेश में 'सत्ता सजातीय' और पुलिस का गठजोड़ साज़िश रचकर 'जाति' देखकर हत्या करवा रहा है। इसके लिए किसी को मिली सुरक्षा हटाने तक का षड्यंत्र किया जा रहा है। सत्ताधारियों को लग रहा है कि जब उनकी सरकार है तब न तो कोई जांच होगी और न ही कोई पकड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री ये क्यों नहीं स्वीकार कर लेते हैं कि उप्र की बागडोर अपराधियों के हाथ में चली गयी है? ऐसे शासन से अच्छी तो अराजकता होती है, जहाँ जनता सरकार के भरोसे तो नहीं होती है। सीसीटीवी के सबूत के बावजूद भी जब अपराधी पकड़ा नहीं जा रहा है, तो फिर न्याय के नाम पर उम्र में बचा क्या। उप्र की इंद्रिय शून्य सरकार को छोड़कर सबको मालूम है कि हत्यारा कौन है।
उप्र की जनता इतनी असुरक्षित कभी न थी। उन्होंने लिखा कि न्यायालय स्वतः संज्ञान लेते हुए तुरंत कार्रवाई करे, यही हमारी पुरजोर मांग है। हत्यारे, संलिप्त पुलिस और भाजपाई माफ़िया कोई बचना नहीं चाहिए। अगर शासन ने कुछ नहीं किया तो वो भी इस अपराध में भागीदार माना जाएगा और सबसे कमज़ोर, हताश और लाचार शासन भी। जिसका इक़बाल नहीं, वो सरकार नहीं।
्सरपा सांसद ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर की हस्तक्षेप की मांग
चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वाराणसी और चंदौली की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए हस्तक्षेप की मांग की। वीरेंद्र सिंह ने पीएम को लिखे पत्र में लिखा कि लगातार उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था बद से बदतर होती जा रही हैं। पुलिस के द्वारा एक तरफा कार्यवाही से जनता का विश्वास पुलिस प्रशासन से उठता जा रहा हैं।
जनता का भरोसा कायम रहे इसके लिए पुलिस एवं प्रशासनिक कार्यवाही पारदर्शी एवं निष्पक्ष प्रतीत होनी चाहिए, परन्तु इसके विपरीत कई ऐसी घटनाएं हमारे उत्तर प्रदेश में घटी है जिससे उत्तर प्रदेश की जनता का भरोसा पुलिस एवं प्रशासनिक कार्य शैलियों से उठता जा रहा हैं।
वीरेंद्र सिंह ने आगे लिखा कि पूर्वांचल में ऐसी कई जघन्य हत्याए हुयी हैं, यदि उन हत्याओं के सापेक्ष पुलिस के द्वारा की गयी कार्यवाही को देखे तो पूरी तरह स्पष्ट हो जायेगा कि पुलिस सत्ता पक्ष के दबाव में निर्दोष को दोषी बनाती हैं और वास्तविक घटना को तोड़-मरोड़ कर अभियुक्तों को बचाने की कोशिश कर रही हैं।
चंदौली में एक राजभर समाज के नौजवान की हत्या हो या प्रजापति समाज के नौजवान की हत्या हो, धानापुर के रायपुर के मुट्टन यादव की हत्या हो या वाराणसी पटेल समाज के हेमंत वर्मा की हत्या या वाराणसी के हरीश मिश्रा के ऊपर जानलेवा हमला और उन्ही पर उल्टे केस थोपना हो, इस तरीके से चुन-चुन कर पी.डी.ए. से जुड़े व्यक्तियों की हत्या भी हो रही हैं ।
उल्टे अपराधियों को बचाने के लिए पुलिस निष्पक्ष कार्यवाही न कर उन्हें प्रताड़ित कर अपराधियों को बचाने का कार्य कर रही हैं। यदि हम बी.एच.यू की घटना को देखें तो अभी तक एग्जीक्यूटिव काउंसिल का गठन न हो पाने से छात्रों, कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं हो पा रहा हैं और कहीं न कहीं पिछड़े, अनुसूचित जाति और इ.डब्लू.एस. से जुड़े पी.डी.ए. के लोगो का अधिकार भी छिना जा रहा हैं।
इन सभी कारणों से जनता में उत्तर प्रदेश सरकार व कानून व्यवस्था के प्रति अविश्वास का वातावरण बन रहा है। हम आपसे हस्तक्षेप की मांग करते है कि उत्तर प्रदेश में हो रहे पी.डी.ए. से जुड़े लोगों का उत्पीड़न को रोका जाए और जनता में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बना रहे. इसके लिए ठोस कार्रवाई करने की कृपा करें।