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जिले के सैनिकों ने बलिदान देकर लिखी नई इबारत

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थल सेना दिवस पर विशेष
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जिले के सैनिकों ने बलिदान देकर लिखी नई इबारत
अशोक चक्र विजेता बेचन सिंह पर है यहां के लोगों को नाज
सचित्र-
अमर उजाला ब्यूरो
पीडीडीयू नगर। धान के कटोरे में देश की आनबान और शान पर न्योछावर होने वालों की कमी नहीं है। कृषि, शिक्षा, साहित्य जैसे क्षेत्रों में यहां की माटी के लालों ने परचम फहराया तो देश सेवा में भी पीछे नहीं रहे। जिले के युवाओं ने सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। ऐसे ही सैयदराजा, धानापुर, चहनिया और पड़ाव के युवाओं ने दुश्मनों को ठिकाने लगाते हुए शहीद हो गए और उन्हें अशोक चक्र जैसे सम्मान से भी नवाजा गया।
01. सैयदराजा। क्षेत्र के भतीजागांव निवासी बेचन सिंह मात्र 21 वर्ष की आयु में 1959 में भारतीय जल सेना में एक सैनिक के रूप में शमिल हुए। वर्ष 19961 में गोवा की लड़ाई के दौरान 18 दिसंबर को लड़ते हुए बेचन सिंह शहीद हो गए। मरणोपरांत उन्हें अशोक चक्र दिया गया। परिवार वालों के अनुसार बचपन से ही बेचन सिंह साहसी थे । और वे कुछ कर गुजरना चाहते थे। उनकी याद में गांव में मूर्ति स्थापित की गई है। प्रति वर्ष शहीद दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। उनके परिवार वालों के साथ गांव और जिले के लोगों को आज भी उन पर गर्व है।
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02.धीरज सिंह ने तीन उग्रवादियों को मार गिराया था
सचित्र-
धानापुर। क्षेत्र के हिंगुतरगढ़ गांव निवसी धीरज सिंह ने जम्मू कश्मीर के हयान जनपद अंतर्गत कंगन गांव में तीन मई 2006 को उग्रवादियों से मुठभेड़ करते हुए तीन उग्रवादियों को मार गिराया था और लड़ते हुए शहीद हो गए। इस अदम्य साहस के लिए 21 मार्च 2007 को राष्ट्रपति ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया। तीन मई 1984 को हिंगुतरगढ में जन्में धीरज सिंह के पिता का नाम मधुकर सिंह और माता ललिता देेवी था। वर्ष 2002 में वे पुलिस में भर्ती हुए। शहीद धीरज सिंह के नाम पर गेट का निर्माण किया गया और गायत्री महिला महाविद्यालय के मैदान में मूर्ति स्थापित की गई। सैयदराजा विधायक सुशील सिंह ने हिंगुतरगढ़ में शहीद धीरज सिंह के नाम पर स्टेडियम निर्माण की योजना बनाई है। इसके लिए दस करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
03. अवधेश कुमार की शहादत पर रोया था पूरा जनपद
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एक वर्ष पहले 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आत्मघाती हमले में बहादुरपुर निवासी सैनिक अवधेश यादव शहीद हो गये थे। उनकी शहादत पर पूरा जनपद ही नहीं पूरा देश उद्वेलित हो गया। 1985 में हरिकेश यादव के पुत्र अवधेश का जन्म हुआ था। स्नातक करने के बाद वर्ष 2009 में जम्मू-कश्मीर के 45 वीं बटालियन सीआरपीएफ में नौकरी मिली। ट्रेनिंग में उन्हें बेस्ट आलराउंड का पुरस्कार भी मिला। प्रमोशन के बाद रेडियो आपरेटर के पद पर तैनाती हुई । अवधेश की याद में कई घोषणाएं की गई लेकिन अभी उसे पूरा नही किया है।
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04.अपनी जान देकर बचाई देश की लाज
सचित्र-
चहनियां। क्षेत्र के नदेसर गांव निवासी चंदन राय 20 जनवरी 2018 को जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले के पूछ सेक्टर के राजौरी पोस्ट पर पाकिस्तानी गोलीबारी का जवाब देते हुए गोली लगने से शहीद हो गए। 21 फरवरी 1992 को जन्मे चंदन जन्म से ही निडर थे। 22 जनवरी 2012 को सेना में भर्ती हुए। अपनी दूसरी पोस्टिंग में ही चंदन शहीद हुए। इनकी याद में गांव में प्रवेश द्वार का निर्माण कराया गया है।
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