पीडीडीयू नगर। लॉकडाउन से रोजगार बंद हुआ। कुछ दिनों तक तो जो पैसे बचे थे, उससे काम चलता रहा। धीरे-धीरे पैसे खत्म हो गए। खाने की दिक्क्त होने लगी। मकान मालिक भी किराए के लिए पेरशान करने लगा। कोई उधार देने को तैयार नहीं था। आखिर पत्नी ने जब गहने बेचे तो आंखों आंसू झलक पड़ें। पैसे खत्म होने के बाद कुछ ने घर के सामान बेच दिए। जिंदगी को संवारने का सपना देख कर महानगरी आए श्रमिकों को हाथ झाड़ कर जाना पड़ रहा है।
मुंबई से पश्चिम बंगाल के आसनसोल के लिए चले प्रवासी श्रमिक असहुल ने बताया कि लॉकडाउन ने बर्बाद कर दिया। बताया कि पांच वर्ष पहले वह मुंबई गया था। आर्टिफिशियल गहने बनाने का काम शुरू किया। अच्छी कमाई हो रही थी। तीन वर्ष पहले शादी हुई। पत्नी और बच्चे घर पर थे। उन्हें पैसा भेजता था। लॉकडाउन लागू होते ही काम बंद हो गया। मांग कर खाने की नौबत आ गई। घर वापस जाने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में पत्नी ने अपने गहने बेचे और पैसे भेजे। इसके बाद ट्रक से घर के लिए निकला हूूं। कब तक पहुंचूंगा पता नहीं। बंगाल के ही नयन खान मुंबई के गोरेगांव में रहकर मजूदरी करता था। वह तीन वर्ष पहले दोस्तों के साथ मुंबई गया था। वह पैसा कमाकर घर वालों की सहायता करना चाहता था। प्रति माह पैसे भी भेजता था। लॉकडाउन के बाद काम मिलना बंद हो गया। किराए के रूम पर रहता था और किराया देने के लिए पैसा नहीं थे। ऐसे में घर का सामान मकान मालिक को बेच दिया। इससे कुछ पैसे मिले और उस पैसे से घर जाने का जुगाड़ हुआ।