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अधिक उपज की चाह में मिट्टी हो रही बीमार

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चंदौली। किसानों में जानकारी का अभाव और अधिक उत्पादन के लिए धड़ल्ले से रसायनों, उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से धान के कटोरे में माटी की उत्पादन क्षमता दिनों दिन घटती जा रही है। रसायनों के प्रयोग को रोकने के लिए कृषि विभाग और विशेषज्ञों की ओर से किसानों को सलाह दी जा रही है मगर इसका असर बहुत नहीं दिखाई दे रहा है। खेतों की मिट्टी से जिंक, कार्बन और फास्फेट की मात्रा घटती जा रही है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहे इसके लिए विभाग की ओर से मिट्टी की जांच कर उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया गया है।
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कृषि विभाग में लगभग दो लाख से अधिक किसान पंजीकृत हैं। कृषि विभाग की ओर से दो चरणों में लगभग एक लाख 75 हजार किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण कराया जा चुका है। मिट्टी की जांच से जो नतीजे निकल रहे हैं उनके अनुसार अधिकांश किसानों की मिट्टी में जीवांश कार्बन, जिंक, फास्फेट की कमी देखने को मिल रही है। जानकारी के अभाव में किसान सही मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं, जिससे फसल की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। कृषि उप निदेशक राजीव कुमार भारती ने बताया कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए किसानों को जैविक खाद के प्रयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बताया कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। सरकार स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही किसानों को उर्वरक की बिक्री करने की योजना बना रही है।
चंदौली। मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहे इसके लिए कृषि विभाग की ओर से मिट्टी की जांच कर 1.75 लाख किसानों को मृदा कार्ड मुहैया कराया गया है। इसमें मिट्टी में पाए जाने वाले 12 तत्वों की रिपोर्ट मौजूद है। लेकिन जिंक, कार्बन और फास्फेट की मात्रा रसायनों के इस्तेमाल से न के बराबर रह गई है। इससे फसल के उत्पादन पर असर पड़ने के साथ ही मिट्टी के बंजर होने की आशंका बढ़ने लगी है।
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चंदौली। बरहनी ब्लाक अंतर्गत आने वाले गांवों की खेतों में करइल मिट्टी पाई जाती है। जिसे काली दोमट मिट्टी के रुप में पहचान मिलती है। इसमें जीवाश्म की अधिकता होने के साथ पानी सोखने की क्षमता अधिक होती है। खासकर यह मिट्टी धान और दलहनी फसलों के लिए अधिक अच्छी मानी जाती है। लेकिन नरवन के रुप में विख्यात इलाके में धान और गेंहू की पैदावार की ज्यादा हो रही है।
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