सांप्रदायिकता समाज को तोड़ रही है। इससे अर्थव्यस्था पर भी विपरीत प्रभाव
पड़ रहा है। शब्दों का संसार प्रकृति के संसार से भी बड़ा है तथा मीडिया
समाज का दर्पण है।
उक्त विचार स्थानीय आदित्य नारायण राजकीय इंटर
कालेज चकिया में भारतीय पत्रकार संघ के तत्वावधान में आयोजित मीडिया एवं
विकास विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि
राज्यसभा सदस्य अली अनवर अंसारी ने कहा कि सांप्रदायिकता के विरुद्ध
मीडिया को मुखर होना चाहिए। जिससे समाज को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा
कि पत्रकार को सवाल पूछने का अधिकार मिला है तथा पत्रकारों को सामाजिक
सुरक्षा मिलनी चाहिए। विशिष्ट अतिथि विधान परिषद सदस्य स्तंभकार हृदयनारायण
दीक्षित ने कहा कि शब्दों का संसार प्रकृति के संसार से भी बड़ा है।
इसलिए
मीडिया का व्यापक प्रभाव समाज पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि मीडिया तथा
समाज दोनों राष्ट्र को संगठित करने की कड़ी है। इसलिए दोनों में सामंजस्य
जरूरी है। प्रसार भारती की स्थानीय प्रमुख डा. नीरजा माधव ने कहा कि बाजार
का प्रभाव बढ़ने से मानव की विचारशीलता बढ़ती है।
मीडिया समाज का दर्पण है
जो समाज का सही दिशा निर्देश करता है। कहा कि अर्थ और काम की अधिकता से
समाज में संस्कारों का लोप हो रहा है।
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से
सम्मानित डा. संदीप पांडेय ने कहा कि मीडिया समाज के हर अवयव को प्रभावित
करता है। जिसमें समाज की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है तथा
अर्थव्यवस्था के विकास तथा फैलाव में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है।
संगोष्ठी में डा. बेनी माधव, डा. पीके मिश्रा, परशुराम सिंह, एसडीएम
रमाशंकर द्विेदी ने भी विचार व्यक्त किए। सेमिनार के पूर्व अतिथियों ने दीप
प्रज्ज्वलित कर मां वीणा वादिनी के चित्र पर माल्यार्पण किया तथा भारत
माता विद्या मंदिर की छात्राओं ने सरस्वती वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत
किए।
सेमिनार में प्रदीप शर्मा, एल. उमाशंकर, एमएम. रहमान, डा. हौशिला
प्रसाद द्विेदी, भारतीय पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष बृजेश सिंह, तहसील
अध्यक्ष प्रशांत कुमार गुप्ता, राजकुमार जायसवाल, कमलेश सिंह आदि मौजूद
थे। अध्यक्षता संरक्षक केसी श्रीवास्तव तथा संचालन उमाशंकर सिंह एड. ने
किया।