जिले में नाग पंचमी का त्यौहार धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर घर-घर में नाग देवता को दूध लावा चढ़ाकर पूजा अर्चना की गई। शिव की अर्चना के लिए मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। लोगों के जयकारे मंदिरों में गूंजते रहे। आज के दिन सपेरों ने नगर में घूम घूम कर नाग के दर्शन कराए और बदले में पैसे लिए।
सावन में भगवान शिव के साथ उनके गले के हार बने सर्प की पूजा की विशेष महिमा बताई जाती है। मान्यता है कि शुल्क पक्ष की पंचमी तिथि को नाग देव की पूजा करने से सर्पदंश का भय समाप्त होता है। यही नहीं घर में सौभाग्य का वास होता है। लोगों के घरों में सुबह से ही पूजन अर्चन की तैयारी शुरू हो गई। साफ सफाई के बाद छोटे गुरु और बड़े गुरु के चित्र को लोगों ने दरवाजे पर चिपकाया और इसके बाद विधि विधान से पूजन किया गया। लोगों ने नागदेव से सौभाग्य और मृत्यु का भय समाप्त करने की प्रार्थना की। घरों में इस उपलक्ष्य में विविध प्रकार के पकवान बनाए गए थे। शिव मंदिरों में भी भक्तों ने पहुंच कर नाग सहित भगवान शिव को भोग लगाया। सुबह से ही लोगों के मंदिरों में आने का सिलसिला शुरू हो गया था। यह देर शाम तक चलता रहा।
नगर की नई बस्ती, कैलाशपुरी, शाहकुटी, पराहुपुर, काली महाल, चतुर्भुजपुर, आरपीएफ कालोनी, गया कालोनी, मानसनगर, डीजल कालोनी, हापड़ कालोनी में शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। अनेक स्थानों पर लोगों ने पेड़ के कोटर, सर्प के बिल के पास भी दूध रखा।
सपेरे भी पिटारे में बंद सर्प लेकर जगह जगह घूमते रहे और लोगों को दर्शन कराया। धानापुर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के गावों में शिव मंदिरों पर दर्शन पूजन के लिए लोग आते रहे।