संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर शनिवार को खेती बचाओ, लोकतंत्र बचाओ नारे के साथ अखिल भारतीय किसान महासभा ने आंदोलन किया। इस दौरान चंदौली जिला मुख्यालय पर जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट गए और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर कृषि कानून 2020 को वापस लेने की मांग की।
जिलाध्यक्ष श्रवण कुशवाहा ने कहा कि 26 जून 1975 को इंदिरा गांधी के तत्कालीन सरकार ने विपक्ष के सभी नेताओं को जेल में डाल दिया। आज एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार अपने विरोधियों को जेल में डाल रही है यह निरंकुश तानाशाही है और इसके खिलाफ पिछले सात महीने से दिल्ली बॉर्डर पर किसान धरने पर बैठे हैं। लेकिन केंद्र सरकार तानाशाही का रास्ता अख्तियार करते हुए किसानों की बातों को सुनने से इन्कार कर दिया। इस स्थिति में किसानों ने आंदोलन तेज करने की रणनीति तैयार किया है। अध्यक्षता किस्मत यादव ने की।
भारतीय किसान यूनियन ने बिछियां धरनास्थल पर धरना-प्रदर्शन करके केंद्र सरकार के कृषि कानून को किसान विरोधी बताया। कहा कि कृषि क्षेत्र में कंपनी राज लागू करने का षड्यंत्र केंद्र सरकार कर रही है। अनाज भंडार से प्रतिबंध हटाना जमाखोरी को बढ़ावा देने के समान है।