पानी पर चलने वाला रिक्शा बनाकर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम के हाथों
पुरस्कृत होने वाले बिहार के सईदुल्लाह 75 साल की उम्र में साइकल से भारत
भ्रमण पर निकले हैं।
सईदुल्लाह ने पुरस्कार जरूर जीते, लेकिन
उन्हें आर्थिक मदद नहीं मिली। इसके बावजूद आईआईटी खड़गपुर के कार्य परिषद
के मानद सदस्य सईदुल्लाह ने हार नहीं मानी और अब देश में घूमकर शिक्षा को
बढ़ावा दे रहे हैं। पिछले चार दिनों से वे नियामताबाद में रुक कर निजी
स्कूल में बच्चों को जानकारी बांट रहे हैं।
बिहार के चंपारण जिले के
जटवा निवासी सईदुल्लाह ने उच्च शिक्षा तो हासिल नहीं की, लेकिन वर्ष 1974
में जब चंपारण में भीषण बाढ़ आई, तो उन्होंने सामान्य साइकल के माडल में
बदलाव कर उसे पानी पर चलने वाला रिक्शा बना दिया। इतना ही नहीं, 1977 में
हाथ से चलने वाला सैनो वाटर पंप बनाया। इससे एक घंटे में दस हजार लीटर पानी
निकलता है।
इसी साल बांस से वाटर फिल्टर बनाया। 1980 में उन्होंने
पंपिंगसेट से चलने वाला ट्रैक्टर भी बनाया। इन कार्यों के लिए वह 44 एकड़
पुश्तैनी जमीन बेच चुके हैं।
सईदुल्लाह को 1994 में चंपारण के तत्कालीन
डीएम सम्मानित कर चुके हैं। 1995 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू
यादव ने पटना में सम्मानित किया। इसी वर्ष सोनपुर मेले में बिहार के
राज्यपाल एआर किदवई ने भी सम्मानित किया था।
1998 में तत्कालीन मानव संसाधन
मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने सईदुल्लाह को सम्मानित किया और केंद्रीय टीम
ने सईदुल्लाह की उपलब्धियों का अवलोकन किया।
वर्ष 2005 में मिसाइल मैन
तत्कालीन राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने अहमदाबाद में उनको सम्मानित
किया।
उनकी उपलब्धियों के लिए खड़गपुर आईआईटी ने उनको मानद सदस्य घोषित किया है, लेकिन आर्थिक मदद न मिलने से सईदुल्लाह परेशान हैं।