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जर्जर भवन, फटीं दीवारें बयां कर रहीं आयुर्वेद अस्पताल की हकीकत

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बरहनी ब्लाक में जर्जर आयुर्वेदिक अस्पताल कम्हरिया - फोटो : CHANDAULI
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पीडीडीयू नगर। कोरोना काल में संक्रमण से बचाव में आयुर्वेद को काफी कारगर माना गया। काढ़ा हो या आयुर्वेदिक दवाएं, लोगों ने इसका सेवन भी किया। आयुुष मंत्रालय ने भी इसके प्रति लोगों को जागरूक किया गया। मगर जिले में संचालित आयुर्वेदिक अस्पतालों की हालत बेहद खराब है। यहां न तो पर्याप्त चिकित्सक हैं और न ही पैरामेडिकल स्टाफ है। हाल तो यह है कि भवन जर्जर हो चुके हैं। दीवारें दरक चुकी हैं। छत से सीलिंग टूटकर गिर रही है। अब इन अस्पतालों में मरीज भी जाने से कतराते हैं।
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जिले में 30 आयुर्वेद अस्पताल संचालित हैं। इसमें बरहनी, चकिया, पीडीडीयू नगर, चहनिया, नौगढ़ सहित अन्य ब्लाकों में अस्पताल हैं। लेकिन उनकी हालत ठीक नहीं है। कहीं चिकित्सक नहीं है तो कहीं दवाई नहीं है। कई जगहों पर फर्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल संचालित हो रहे हैं। कई जगह तो किराए के भवन में अस्पताल चल रहे हैं।
नौगढ़ संवाददाता के अनुसार मझगावां आयुर्वेदिक अस्पताल में न तो चिकित्सक हैं और न ही फमार्सिस्ट हैं। वहां वार्ड ब्वाय के भरोसे इलाज चल रहा है। यही स्थिति गहिला में हैं। वहां भी सिर्फ फर्मासिस्ट हैं। उन्हीं के भरोसे अस्पताल का संचालन हो रहा है। सकलडीहा संवाददाता के अनुुसार आयुर्वेद अस्पताल सेवखर में एक-एक चिकित्सक, वार्ड ब्वाय, स्वीपर तैनात हैं। लेकिन यहां दवाओं का टोटा है। यहां भी मरीज इलाज के लिए जाने से कतराते हैं। कंदवा संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के कम्हरिया, ओयरचक और चिरईगांव में आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित होते हैं। कम्हरिया और चिरईगांव का आयुर्वेदिक अस्पताल जर्जर हो चुका है। यहां फर्मासिस्टों के भरोसे अस्पताल चल रहा है।
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पीडीडीयू नगर। जिले में 30 आयुर्वेदिक अस्पताल और पीडीडीयू नगर में कैंप कार्यालय है। आयुर्वेद अस्पताल चिरईगांव, ओयरचक, कम्हरिया, सहजौर, शहाबगंज, शिकारगंज, सिकंदरपुर, दुलहीपुर, जगदीश सराय, सरैया बसाढ़ी, मटपुरवा, कुरहना, शहीदगांव, सदलपुरा मारुफपुर, बनौली कला, उतरौत, धीना, केशवपुर, बबुरी, पांडेयपुर, पचोखर, कठौरी, भुजना, मझगांवा, गहिला, रामगढ़, पपौरा, भसवारा खुर्द में संचालित हैं। इसमें से 50 फीसदी अस्पताल किराए के भवन में हैं जबकि बाकी खुद के भवन हैं। लेकिन किराए का भवन हो या फिर सरकारी सबकी हालत खराब है।
कंदवा। क्षेत्र के कम्हरिया और चिरईगांव आयुर्वेद अस्पताल को 2003 में जर्जर हो घोषित किया जा चुका है। इससे वहां मरीज भी जाने से कतराते हैं। ओयरचक आयुर्वेदिक अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ओयरचक के भवन में ही संचालित किया जाता है। दो अस्पतालों में फार्मासिस्ट के भरोसे ही संचालित किए जाते हैं। जबकि ओयरचक में एक चिकित्सक को एक सप्ताह से अटैच किया गया है ताकि मरीजों का इलाज हो सके।
कोरोना काल में आयुर्वेद की दवाओं और काढ़े का वितरण किया जा रहा है। जर्जर भवन की मरम्मत करने और चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र भी भेजा जा चुका है। वहां से धन मिलते ही अस्पतालों की व्यवस्था दुरुस्त करा दी जाएगी।
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डॉ. भावना द्विवेदी, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी।
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