सकलडीहा के पौरा रेलवे क्रॉसिंग के पास महिला की मौत के बाद रोते बिलखते परिवार के लोग। संवाद
कोतवाली के पौरा रेलवे क्रॉसिंग के पास शुक्रवार को बेटी को बचाने में रेलकर्मी की पत्नी लक्ष्मीना (42) ट्रेन से गिर गई। ट्रेन की चपेट में आने से लक्ष्मीना की माैके पर ही माैत हो गई। वहीं बड़ी का दाया पैर कट गया। मां-बेटी मेमू ट्रेन में सवार होकर दवा लेने के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन जा रही थी। लक्ष्मीना की बड़ी बेटी पूजा की दो माह पहले ही शादी हुई। वहीं छोटी बेटी अनुराधा की शादी 20 फरवरी को तय है। शादी के एक सप्ताह पहले मां की मौत से शादी वाले घर में मातम छा गया।
सकलडीहा कोतवाली के दिघवट गांव निवासी पं. दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल में कर्मचारी रमेश ने बताया कि शुक्रवार सुबह पत्नी लक्ष्मीना (42) बड़ी बेटी पूजा (20) को लेकर तुलसी आश्रम स्टेशन से पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर जाने के लिए मेमू ट्रेन में सवार हुई। पूजा का इलाज पीडीडीयू नगर में एक निजी चिकित्सक के यहां चल रहा है। पौरा रेलवे क्राॅसिंग के समीप पूजा ट्रेन के दरवाजे पर आ गई और वह बाहर देखने लगी। इसी बीच ट्रेन के झटका लेने पर वह नीचे गिरने लगी। बेटी को बचाने के लिए लक्ष्मीना आई और उसके पकड़ने के चक्कर में वह भी नीचे गिर गई। ट्रेन की चपेट में आने से लक्ष्मीना की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं पूजा का दाया पैर कट गया। सूचना पर माैके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। वहीं पूजा को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। लक्ष्मीना की तीन बेटियां और एक बेटे की मां थीं। थानाध्यक्ष भूपेंद्र कुमार निषाद ने बताया कि ट्रेन की चपेट में आने से महिला की मौत हुई है। उनकी बेटी जख्मी हुई है। पुत्री को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
छोटी बेटी को दुल्हन बनते नहीं देख पाई लक्ष्मीना
सकलडीहा। रेलककर्मी रमेश राय ने बताया कि बड़ी बेटी पूजा की शादी 06 दिसंबर 2025 को नियामताबाद गांव में अनुज के साथ हुई थी। वहीं दूसरी बेटी अनुराधा की शादी 20 फरवरी को इलिया के वीरभानपुर गांव में तय है। शादी में शामिल होने के लिए पूजा भी मायके आई थी। इस बीच दवा लेने के लिए पीडीडीयू नगर जाते समय हादसा हो गया। जहां घर में शादी का माहौल था, वहीं अब मातमी सन्नाटा पसर गया है। मां की मौत और बहन की ऐसी हालत देख कर बेटी अंशु और बेटा गुंजन का रो रोकर हाल बेहाल हाे गया। पति रमेश राय की तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि पत्नी की मौत का गम मनाए कि बेटी के हाल को देखे। रमेश बार बार यही कर रहे थे हाथों की मेहंदी के रंग भी फीके नहीं हुए थे पूजा का पैर कट गया। अब वह जीवन वैशाखी के सहारे गुजरेगी। लक्ष्मीना छोटी बेटी को दुल्हन बनते नहीं देख पाई।