वेद के बिना विज्ञान अधूरा है।
यदि वेद का ज्ञान न हो, तो बिना
विज्ञान की कल्पनाएं बेकार साबित होंगी। विज्ञान ने बंदूक का आविष्कार
किया।
यदि मनुष्य को धर्म और वेद का ज्ञान न हो, तो वह बंदूक का इस्तेमाल
आत्मरक्षा के लिए नहीं बल्कि हत्या के लिए करेगा। आजकल लोग धार्मिक कार्यों
में रुचि नहीं ले रहे हैं।
उक्त विचार बबुरी में 22 नवंबर से 25 नवंबर तक
आयोजित धर्म सभा में पहुंचे पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने
धर्म गोष्ठी में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सभी धर्मों के
प्रति सहिष्णुता का भाव रखने की बात करता है।
अन्य धर्मों के लोग अपने
धर्मों के प्रति समर्पित हैं, लेकिन हिंदू समाज धीरे-धीरे धर्म से कट रहा
है। लोग धार्मिक कार्यों में रुचि नहीं ले रहे हैं। इससे समाज में विघटन व
वैमनस्यता की भावना फैल रही है।
कहा कि गोहत्या को लेकर इस समय काफी विवाद
चल रहा है।
सनातन धर्म में गाय को पूजनीय माना जाता है। देश में गोहत्या पर
पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गोहत्या पर रोक लगाने के लिए
उन्होंने स्वयं बद्रीनाथ से लेकर दिल्ली तक पैदल यात्रा की थी।
इससे
तत्कालीन सरकार घबरा गई थी और 12 दिनों तक मुझे तिहाड़ जेल में रखा गया।
उन्होंने धर्म की मूल नीतियों, जीव व आत्मा के संबंध के बारे मे विस्तार से
चर्चा की। इस दौरान रामाश्रय तिवारी, सारनाथ तिवारी, टुनटुन सिंह,
चंद्रप्रकाश गांधी, राजेंद्र सिंह, शशिप्रकाश गांधी, सुभाष जायसवाल, गोपाल
जायसवाल आदि मौजूद रहे।