कंदवा। केंद्र सरकार की ओर से धान के समर्थन मूल्य में सिर्फ 53 रुपए की वृद्धि किए जाने से किसानों में नाराजगी है। इस वृद्धि को किसानों ने नाकाफी बताया है। किसानों ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए सरकार से धान का समर्थन मूल्य 2200 रुपए प्रति कुंतल किए जाने की मांग की है।
किसान नेता रतन सिंह ने कहा कि कृषि में लागत मूल्य लगातार बढ़ती जा रही है। इसके चलते किसानों व युवाओं का खेती किसानी से मोह भंग होता जा रहा है। कहा कि अगर सरकार किसानों का मदद करना चाहती है तो स्वामी नाथन कमेटी के सिफारिशों को लागू करे। असना गांव निवासी भाकियू भानु के मण्डल अध्यक्ष सन्त विलास सिंह ने कहा कि धान का समर्थन मूल्य 2200 रुपए प्रति कुंतल किया जाए। किसानों को कृषि में आर्थिक हानि से बचाया जा सके। चिरईगांव निवासी किसान नेता सुमंत अन्ना ने कहा कि यूपीए सरकार में धान के समर्थन मूल्य में 60 रुपए की बढ़ोतरी किए जाने पर भाजपा के लोग शोर शराबा कर रहे थे लेकिन सरकार के निर्णय ने किसानों के प्रति सोच को स्पष्ट कर दिया है। अदसड़ निवासी किसान पिंटू सिंह ने कहा कि किसानों का हितैषी होने का दावा करने वाली सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी। कहा कि अगर सरकार किसानों की मदद नहीं कर सकती तो बाजार खुला छोड़ दे इससे किसानों को अच्छी आमदनी होगी।