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मनुष्य बनने के लिए निर्धारित किए गए हैं नियम

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धानापुर क्षेत्र के बूढ़ेपुर गांव में चल रहे चतुर्माय यज्ञ में बृहस्पतिवार को संत जीयर स्वामी ने कहा कि मनुष्य बनने के लिए कुछ नियम निर्धारित हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि केवल जन्म ले लेने से कोई मनुष्य नहीं हो जाता। मनुष्यता प्राप्त करने के लिए अलग से शिक्षा प्रणाली पर ध्यान देना होगा। मनुष्यता के लिए कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। रावण ने वरदान मांगा था कि नर और वानर के सिवाय किसी दूसरे के हाथों उसकी मौत न हो क्योंकि वह जानता था कि दुनिया में कोई मनुष्य हो ही नहीं सकता है।
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कहा कि जन्म लेते ही मानव तीन प्रकार के ऋण से घिर जाता है। इनमेंमाता पिता, ऋषि व देवताओं का कर्ज शामिल है। माता पिता के तेज से पैदा होने के कारण उनके कर्जदार हुए। माता-पिता के ऋण से उऋण होने के लिए उनके कड़े स्वभाव को बर्दाश्त करना चाहिएक्योंकि माता-पिता भी आपको बर्दाश्त कर चुके हैं। पत्नी के प्रति स्नेह रखिए लेकिन माता-पिता नहीं होते तो पत्नी से स्नेह नहीं होता। माता-पिता को उदास, निराश, अपमानित करने वाले की रक्षा देवता भी नहीं करते। ऐसा करने वाला नरक का भागी होता है। इसलिए माता-पिता को कष्ट नहीं देना चाहिए। इस मौके पर भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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