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आरपीएफ की छापेमारी का विवाद पहुंचा डीआरएम दरबार

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पीडीडीयू नगर। रेलवे सुरक्षा बल की ओर से सोमवार को स्टेशन और ट्रेनों में छापेमारी कर रेल नीर से इतर गैर रजिस्टर्ड ब्रांड पानी की बरामदगी और वेंडरों को गिरफ्तार किए जाने का मामला मंडल रेल प्रबंधक के दरबार में पहुंच गया है। सीनियर डीसीएम ने इस पूरी कार्रवाई को गलत बताते हुए डीआरएम से शिकायत की है। वहीं गया रेलवे स्टेशन पर छापेमारी के बाद स्टाल बंद चल रहे हैं। दूसरी तरफ आरपीएफ इस छापेमारी को पूरी तरह अपने अधिकार क्षेत्र का बता रही है।
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रेलवे सुरक्षा बल ने सोमवार को स्टेशन और ट्रेनों में जांच पड़ताल की। इस दौरान बड़े पैमाने पर गैर ब्रांडेड पानी के साथ छह लोगों का चालान किया। आरपीएफ ने मंडल के गया स्टेशन पर भी छापेमारी कर बड़े पैमाने पर न सिर्फ पानी बरामद किया बल्कि कई वेंडरों को गिरफ्तार जेल भी भेज दिया। इसके बाद से गया में करीब दस स्टाल बंद चल रहे हैं। वेंडरों ने सीनियर डीसीएम को पत्र भेज कर शिकायत की है। वाणिज्य विभाग ने डीआरएम को पत्र देकर सूचना का अधिकार के तहत मिली सूचना का हवाला देते हुए इसे गलत करार दिया है। वर्ष 2017 में दिल्ली के मकान नम्बर 52/42 गली नंबर 17 निवासी नरेश कुमार ने सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगी थी कि क्या रेलवे स्टेशन पर अधिकृत वेंडरों का मेडिकल,फूड लाइसेंस,यूनिफार्म, नम्बर प्लेट, आई कार्ड,क्या बेचने की अनुमति है कि जांच आरपीएफ कर सकती है। इसके जवाब में मंडल वाणिज्य प्रबंधक ने कहा था कि आरपीएफ को इसका अधिकार नहीं है। इस संबंध में वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक रूपेश कुमार ने बताया कि आरपीएफ का अभियान गलत है। गया में जांच में स्टालों को बंद करा दिया। इससे राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं कहा कि आरपीएफ को अवैध वेंडरों के खिलाफ अभियान चलाना था लेकिन आरपीएफ टीम वैध वेंडरों का ही चालान कर दी है। वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त आशीष मिश्र ने कहा कि छापेमारी कर हमने वाणिज्य विभाग की सहायता की है। नियम का किसी प्रकार से उलंघन नहीं हुआ है। कहा कि गैर पंजीकृत ब्रांड का पानी बेचना अपराध है और इसके तहत कार्रवाई हुई है।
पीडीडीयू नगर। रेलवे में कागजों के खेल के नाम पर बडे पैमाने पर कमिशन खोरी का खेल चल रहा है। नियमों की आड़ में लाखों का वारा न्यारा हो जा रहा है। विभागीय सूत्रों की माने तो पानी को लेकर भी नियमों की आड़ में गोरखधंधा चल रहा था।
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रेलवे में रेल नीर बेचने का निर्देश है। यह अन्य ब्रांडों के मुकाबले सस्ता पड़ता है लेकिन बेचने को वालों को कमिशन कम मिलता है। नियमत: पानी की अधिक खपत होने और रेल नीर की उपलब्धता न हो पाने की स्थिति में मुख्य वाणिज्य प्रबंधक दूसरे कुछ ब्रांडों की पानी स्टेशन और ट्रेनों में बेचने के लिए एप्रुवल देते हैं। जून 2018 के बाद सीसीएम की ओर से अन्य ब्रांडों के पानी को बेचने की अनुमति पत्र जारी ही नहीं किया गया। ऐसे में ट्रेनों और स्टालों पर धड़ल्ले से दूसरे ब्रांडों का पानी बिक रहा था। छापेमारी के बाद जब बड़े पैमाने पर पानी बरामद हुई तो देर रात लगभग दस अन्य ब्रांडों को बेचने की अनुमति पत्र जारी हो गया।
पीडीडीयू नगर। स्थानीय रेलवे मंडल में वेंडर और ट्रेनों में चलने वाले पेंट्रीकार मैनेजरों की पकड़ बहुत मजबूत है। स्टेशन पर ट्रेनों में रेल नीर से इतर गैर रजिस्टर्ड पानी के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश डीआईजी रेलवे ने आरपीएफ को दिया। दो दिवसीय अभियान के साथ ही यह पत्र वेंडरों और पेंट्रीकार संचालकों के पास पहुंच गया। यही नहीं दो वर्ष पहले सूचना के अधिकार के तहत रेलवे द्वारा जारी किए गए जवाब की कापी भी सभी के पास पहुंच गई। इसके आधार पर सभी एक सुर से आरपीएफ के इस कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया है।
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