ईंट निर्माता समिति की बैठक रविवार को स्थानीय कैंप कार्यालय पर हुई।
इसमें
प्रदेश सरकार द्वारा ईंट-भट्ठों पर रायल्टी बढ़ाए जाने पर चिंता व्यक्त
की गई। भट्ठा संचालकों ने कहा कि सरकार के इस फैसले से भट्ठा मालिकों पर
बोझ बढ़ जाएगा। लेकिन इस निर्णय के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी।
महामंत्री
रतन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि भूूतत्व एवं खनिज मंत्रालय उत्तर
प्रदेश सरकार द्वारा जारी पत्र में दो मीटर की गहराई तक मिट्टी का
हस्त खनन प्रक्रिया से मुक्त करने की बात कही गई है। इस तरह ईंट भट्ठों
पर से स्वच्छता प्रमाण पत्र की बाध्यता समाप्त समझी जानी चाहिए।
कहा कि
मंत्रालय के उक्त निर्णय से ईंट-भट्ठा चलाने का मार्ग साफ हो गया है।
लेकिन सरकार ने 140 प्रतिशत रायल्टी बढ़ा दी है, जो असहनीय है। इसके लिए
प्रदेश स्तर पर आंदोलन चलाने की जरूरत है।
भट्ठा संचालन न्यायालय की भी
शरण लेंगे। उपाध्यक्ष ओपी सिंह ने कहा कि स्वच्छता प्रमाण पत्र की
बाध्यता का समाप्त होना एक बड़ी सफलता है।
भट्टा संचालकों से कई
परिवारों को रोजी-रोटी मिलती है। मजदूरों के घरों से चूल्हे जलते है। लेकिन
सरकार भट्टा मालिकों के हित के बारे में नहीं सोचती है। कहा कि स्वच्छता
प्रमाण पत्र की बाध्यता तो समाप्त हो गई है लेकिन रायल्टी की समस्या आ
खड़ी हुई है ।
भट्ठा संचालक इस समस्या के खिलाफ भी मिलकर लड़ाई
लड़ेगे। जब तक इसका समाधान नहीं हो जाता। इस अवसर पर मंगला सिंह, शिवकुमार
मौर्य, रामजनम मौर्य, राजेश, अशोक सिंह, संतोष तिवारी आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रामगोपाल सिंह ने की।