सकलडीहा। स्थानीय विकास खंड के बरठी गांव में एक दिव्यांग दंपति के 15 वर्षीय बेटे बिट्टू कुमार को पिछले दिनों किडनी में इंफेक्शन हो गया था। उसके इलाज के लिए परिजन सरकारी अस्पताल के अलावा प्राइवेट अस्पताल का भी चक्कर काटने को विवश थे। इसकी जानकारी होने परवाराणसी के एक निजी अस्पताल ने बिट्टू का मुफ्त में इलाज शुरू कर दिया है। इसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है। बता दें अमर उजाला ने 23 अगस्त को इस खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। इसके बाद 24 अगस्त को पीड़ित के घर पहुंची डाक्टरों की टीम किशोर को अपने साथ ले गई और उसका इलाज चल रहा है। अब उसकी तबियत में काफी सुधार है।
गांव निवासी शिवपूजन राम व तारा देवी पैरों से दिव्यांग है। परिवार का पेट पालने के लिए कपड़ा सिलाई ही उनका एक मात्र सहारा है लेकिन कोरोना काल में परिवार पर मुसीबत बढ़ गई है। शिवपूजन के 15 वर्षीय पुत्र बिट्टू की किडनी में इंफेक्शन है। इस कारण उसके शरीर फूलना शुरू हो चुका था। पति-पत्नी के दिव्यांग होने की वजह से इनके पास प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड भी है लेकिन यह इनके बेटे के इलाज में मदद नहीं कर कर पा रहा था। बच्चे के इलाज के लिए मां व बाप ने गांव के ग्रामीणों से भीख तक मांगी और चंदौली के एक निजी अस्पताल में इलाज कराया। यहां डाक्टरों ने बिट्टू का आपरेशन कराने की सलाह दी। पिता शिवपूजन बताते हैं कि प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी कहीं कोई अस्पताल बिट्टू का इलाज करने के लिए तैयार नहीं हुआ। जब अमर उजाला में दिव्यांग मां बाप के बच्चे के बारे में खबर प्रकाशित हुई तो वाराणसी स्थित मैक्सवेल हास्पिटल के कर्मचारी व डाक्टर गांव पहुंचे। वे इलाज के लिए बिट्टू को अस्पताल ले गए। सोमवार को बीमार बिट्ट के पिता ने बताया कि दवा से आराम मिलना शुरू हो गया है। इलाज का कोई खर्च नहीं लिया जा रहा है। वहीं अस्पताल के मैनेजर डा. एसएन पांडेय ने बताया कि बिट्टू की जांच चल रही है। रिर्पोट के अनुसार इलाज हो रहा है। उसके जल्द ही ठीक हो जाने की उम्मीद है।