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कुम्हार समाज की उपेक्षा की

Mon, 22 Feb 2016 12:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
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राष्ट्रीय कुम्हार सभा के तत्वावधान में रविवार को महात्मा संतराम की जयंती स्थानीय काली जी के पोखरे पर  मनाई गई।
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इस दौरान महात्मा संतराम के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस   अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरटीओ चुन्नीलाल प्रजापति ने कहा कि   प्रजापति समाज का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है।


  महात्मा  संतराम के जीवन  पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि महात्मा संतराम का  जन्म सन 1922 में  पंजाब प्रांत के होशियारपुर जिले में हुआ था।

 उन्होंने  जीवनपर्यंत छूआछूत  का विरोध किया और जाति-पात तोड़क मंडल की स्थापना की।  समाज से अस्पृश्यता  को समाप्त करने के लिए उन्होंने कई साहित्यों की रचना  की। कहा कि  राजनीतिक दलों ने शुरू से ही कुम्हार समाज  के लोगों की उपेक्षा  की है। कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेज अधिकारी  जेएच ह्यूटन के सर्वे  में कुम्हारों को अनूसूचित जाति का दर्जा दिए जाने  की बात कही गई थी लेकिन  देश के राजनीतिक दलों के साजिश के चलते कुम्हारों  को अनूसूचित जाति में  नहीं रखा गया है।
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वर्तमान में यह मामला अदालत में  लटका हुआ है।

उन्होंने  समाज के लोगों से एकजुट होकर हक की लड़ाई लड़ने की  अपील की। कार्यक्रम में  चेखूर प्रसाद प्रजापति, राजेश प्रजापति, मितलू  प्रजापति, बैजनाथ प्रजापति,  कैलाशनाथ प्रजापति, मनोज प्रजापति, रविशंकर  प्रजापति आदि मौजूद रहे।  अध्यक्षता राजेंद्र प्रजापति व संचालन महेश  प्रजापति ने किया।
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