जिले के अस्पतालों के रेफर-रेफर के खेल में मंगलवार की रात एक गरीब महिला की जान चली गई। बृहस्पतिवार को परिजनाें ने जिला पंचायत सदस्य से इसकी शिकायत की और पूरा घटनाक्रम बताया। भदलपुर के दुक्खू मुसहर की पत्नी आशा को बुधवार को पीएचसी चंदौली में मृत बच्चा हुआ। उसके बाद हालत उसकी हालत खराब हो गई। रेफर के बाद जिला अस्पताल ले गया। जहां के चिकित्सकों ने भी वाराणसी रेफर कर दिया। वह पैसा न होने की दुहाई देकर गिड़ड़िता रहा लेकिन डॉक्टर नहीं पसीजे। पत्नी को घर ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।
दुक्खू मुसहर की पत्नी 25 वर्षीय आशा देवी को 1 नवंबर को प्रसव पीड़ा होने पर पीएचसी चंदौली पर भर्ती कराया, जहां आशा को मृत बच्ची पैदा हुई। प्रसव के बाद पत्नी की हालत बिगड़ने लगी। यह देख चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। चिकित्सकों ने खून की कमी बताई। दुक्खू ने अपनी गरीबी का हवाला देते हुए पत्नी आशा का उपचार करने व उसकी जान बचाने की गुजारिश की, लेकिन डॉक्टर ने वाराणसी फर कर दिया।
दुक्खू अपनी पत्नी को वाराणसी भर्ती कराने में असमर्थ रहा और चिकित्सकों की रेफर पर्ची के साथ उसे घर लेकर चल पड़ा लेकिन रास्ते में आशा ने दम तोड़ दिया। आशा के तीन छोटे बच्चे रुपा 5 वर्ष, अंजू 3 वर्ष व संतू 1 वर्ष उम्र हैं। जिला पंचायत सदस्य रमेश यादव ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर दुक्खू की पत्नी आशा की डिलेवरी नार्मल हुई थी। पति दुक्खू मजदूरी करता है। दो महीने पहले दुक्खू के पिता कैलाश मुसहर 50 वर्ष की बीमारी के कारण मौत हो चुकी है। जिला पंचायत सदस्य रमेश यादव ने जिलाधिकारी से दुक्खू को प्रशासनिक मदद दिलाने की मांग की है।
उधर, सीएमएस डा. उर्मिला सिंह ने ऐसे किसी मामले की प्रति अनभिज्ञता जताई। कहा जानकारी के बाद ही कुछ स्पष्ट कहा जा सकता है। कहा कि चिकित्सकों द्वारा मामले की गंभीरता के आधार पर ही मरीज को रेफर किया जाता है।