पीएमओ के दो वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न बिंदुओं पर अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। शनिवार को दोनों रेल मंडलों को मिलाकर एक मंडल बनाने के मुद्दे पर करीब तीन घंटे तक बैठक चली, जिसमें विस्तृत चर्चा हुई।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पीएमओ की सक्रियता को देखते हुए इस मामले में जल्द ही कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2025 में बनारस से खजुराहो तक बंदे भारत को हरी झंडी दिखाने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस विषय को उठाया था।
दोनों रेल मंडलों को मिलाकर एक करने पर कैंट रेलवे स्टेशन समेत आसपास के स्टेशनों को एक ही मंडल में शामिल किया जा सकता है, जिससे सुविधाओं का विस्तार होगा। ट्रेनों के संचालन में आ रही बाधाएं दूर होंगी, जिससे वाराणसी समेत पूर्वांचल के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। स्टेशन पर विकास, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं से जुड़े कार्यों के क्रियान्वयन में देरी नहीं होगी। ट्रेनों के संचालन, यात्री सुविधाओं और सुरक्षा की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। यदि दोनों मंडलों को मिलाकर एक मंडल बताया जाता है, तो नियमानुसार अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्य विकल्प भी मांगा जाएगा।
शहर के विकास कार्यों की हकीकत सोमवार को पीएमओ की टीम परखेगी। तरुण कपूर की अगुवाई में पीएमओ की टीम यहां की विकास से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा कर रही है। किन योजनाओं का कितना लाभ लोगों को मिला। खासकर रोपवे, मणिकर्णिका, हरिश्चंद्र घाट पर चल रहे निर्माण कार्यों के बारे में पता कर रही है। सीएसआर फंड से हो रहे कामकाज का ब्योरा लेगी। एक अधिकारी ने बताया कि विगत दो दिनों से वह गुप्त रूप से विकास कार्य वाले स्थानों पर जाकर रिपोर्ट तैयार कर रही है। जिस पर पीएमओ की टीम संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करेगी।