चंदौली। पं. कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय में 28 साल बाद लोगों को फिजियोथेरेपी की सुविधा मिलेगी। इसके लिए मई महीने में ट्रायल किया गया। इस दौरान प्रतिदिन 15 से ज्यादा लोग सर्वाइकल, कमर दर्द, पीठ दर्द, पैर व हाथ दर्द का इलाज कराने पहुंचे। मई महीने में 500 से ज्यादा लोग फिजियोथेरेपी के लिए पहुंचे। अब यह सुविधा स्थायी रूप से मिलेगी। फिजियोथेरेपी के लिए पहले लोगों को 40 किमी की दूरी तय कर वाराणसी जाने के लिए मजबूर होना पड़ता था।
वाराणसी से अलग होकर चंदौली 1997 में जिला बना। इसके बाद से जिले की गिनती पिछड़े जिलों में होती रही। यहां सबसे ज्यादा दिक्कत चिकित्सा सुविधाओं की है। यहां अत्याधुनिक सुविधाएं न होने से लोग वाराणसी और अन्य जिलों में इलाज कराने जाते है। इनमें एक बड़ी सुविधा फिजियोथेरेपी है। इस समय सर्वाइकल, कमर दर्द, पीठ दर्द, पैर व हाथ दर्द के ज्यादा लोग शिकार हैं। लोगों की इस तरह की समस्या को देखते हुए पं. कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय में फिजियोथेरेपी की शुरुआत की तैयारी शुरू हुई। मई महीने में ट्रायल भी शुरू हुई, जो सफल रही। प्रतिदिन औसतन 15 से अधिक मरीज फिजियोथेरेपी के लिए आ रहे हैं। यहां उनका इलाज किया जा रहा है। इससे मरीजों को राहत भी मिल रही है। साथ ही उनका बाहर फिजियोथेरेपी कराने का खर्च भी बच रहा है। अस्पताल के डॉ. संजय कुमार ने बताया कि सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण पीठ और कमर दर्द के साथ ही सर्वाइकल से लोगों को परेशानी हो रही थी। हालांकि अस्पताल में फिजियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध होने से अब मरीजों को राहत मिल रही है। पं. कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सुप्रिया यादव का कहना है कि अस्पताल में फिजियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध होने से लोगों को काफी राहत मिलेगी। मई महीने में 500 से अधिक मरीज उपचार के लिए आए। इनमें ज्यादातर सर्वाइकल, पीठ, कमर और घुटने के दर्द से पीड़ित थे। अगर मरीज को घुटने व शरीर के किसी अंग में दर्द हो तो हड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर फिजियोथेरेपी करा सकता है।