बलुआ गंगा घाट पर स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
चहनिया। सर्वाधिक पुण्यदायी मानी जाने वाली निर्जला एकादशी पर बृहस्पतिवार को पश्चिम वाहिनी बलुआ गंगा घाट पर आस्थावानों की भीड़ उमड़ पड़ी।
इस बार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर दुर्लभ संयोग बनने के कारण श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त से ही मां गंगा में पुण्य की डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हुआ, जो दिन भी चलता रहा।
बलुआ घाट पर सुबह से ही हर-हर गंगे और जय श्रीहरि के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद भगवान विष्णु एवं भगवान शिव का पूजन-अर्चन किया। मंदिरों में दर्शन-पूजन के साथ जप, तप, हवन और दान-पुण्य का सिलसिला दिनभर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने व्रत रखा और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत साल भर की सभी 24 एकादशी के बराबर पुण्य प्रदान करता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित कर सुख, समृद्धि और मोक्ष की कामना की। गरीबों को अन्न, वस्त्र का दान भी किया। गंगा घाट पर भीड़ को देखते हुए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। बलुआ थानाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें तैनात थीं।
कंदवा : निर्जला एकादशी पर गंगा स्नान के लिए क्षेत्र के घाटों पर दिनभर भीड़ लगी रही। गंगाधाम आश्रम महुंजी के महात्मा प्रकाशानंद ने कहा कि भीमसेनी एकादशी को निर्जला एकादशी भी कहा जाता है। यह भगवान विष्णु की आराधना का विशेष पर्व है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान करने से मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है।