पीडीडीयू नगर। क्षतिग्रस्त सड़कों पर बने गड्ढ़े, दिन-रात उड़ रही धूल और गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं में घायल हो रहे राहगीर, अब यही पहचान है एशिया की सबसे बड़ी चंदासी स्थित कोल मंडी की। सरकार को जिले में सबसे ज्यादा राजस्व देने वाली इस कोल मंडी में सुविधाओं का इतना अभाव है कि लोग यहां से गुजरना ही नहीं चाहते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी यहां कोयला लदे ट्रकों के आने जाने के कारण उड़ने वाली धूल से हो रही है।
चंधासी कोल मंडी में जिधर भी देखें, दुर्व्यवस्था ही नजर आती है। इस कोयला मंडी से हर महीने करोड़ों रुपये का राजस्व सरकार के खाते में जाता है लेकिन अब तक यहां के विकास के नाम पर कुछ भी खर्च नहीं किया गया है। मंडी में पेयजल, शौचालय व सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। कोयला मंडी में व्यापारी व मजदूर मिलाकर लगभग 50 हजार लोग भारी-भरकम राजस्व देने के बावजूद ठगे जा रहे हैं। चुनाव-दर-चुनाव हुए, निजाम बदला लेकिन किसी ने भी इस आबादी की सुधि नहीं ली। वहीं इन दिनों सिक्स लेन के नाम पर खोदकर छोड़े गए गड्ढों से निकली मिट्टी भी धूल बनकर उड़ रही है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी बाइक और साइकिल सवारों को होती है।
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भीतरी सड़कों पर मिलते हैं एक से डेढ़ फीट के गड्ढे
कोयला मंडी की भीतरी इलाकों की सड़कों की हालत यह है कि लगभग सभी पर डेढ़ से दो फीट के गड्ढे मिल जाएंगे। सड़क के किनारे गड्ढों में ही ट्रक खड़े होते हैं। व्यापारी व कर्मचारी धूल, मिट्टी व कीचड़ से होकर ही अपने ट्रांसपोर्ट पर पहुंचते हैं। सरकारी पेयजल की कोई सुविधा नहीं। चिकित्सा व्यवस्था एवं विद्युत व्यवस्था भी नहीं है। वहीं आसपास के गांवों के ग्रामीण सांस संबंधी बीमारियों के शिकार होने लगे हैं। इसके बावजूद यहां की दुर्व्यवस्थाओं पर किसी जन प्रतिनिधि या अधिकारी की नजर नहीं पड़ रही है।
कोलमंडी में समय-समय पर पालिका के कर्मचारियों को भेजकर सड़क के किनारे जमा धूल की सफाई कराई जाती है। पिछले रविवार को भी धूल की सफाई कराई गई थी। सड़क के क्षतिग्रस्त होने के कारण धूल जल्दी जमा हो जाती है। सिक्स लेन बन जाने के बाद समस्या का समाधान हो जाएगा। सोनू किन्नर, चेयरमैन, नगर पालिका परिषद, पीडीडीयू नगर।