पीडीडीयू नगर। कोरोना वायरस के चलते लागू लाकडाउन में जिले के पशुपालकों के सामने दूध खपाने का भी संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में पशुपालक दूध बेचने को लेकर परेशान हैं। बाजार में लोगों के बाहर नहीं निकलने और कोरोना के भय से बहुत लोग दूध भी नहीं ले रहे हैं ऐसे में दूध को खपाना उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जो लोग दूध ले रहे हैं उन्हें काफी सस्ते दाम पर बेचना पड़ रहा है। अब पशुपालक दूध बाजार में बेचने के बाद के बाद जो बच रहा है उससे दही तैयार कर घी निकाल रहे हैं। साथ ही दूध से पनीर, खोवा तैयार कर गांवों में सस्ते दाम पर बेच रहे हैं। साथ ही लोगों के बीच बांट भी रहे हैं। पशुपालकों का कहना है कि घाटा तो उठाना पड़ रहा है लेकिन वे इधर-उधर फेंकने के बजाए उसे दूसरे रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। दूध और पनीर-खोवा विक्रेता अशोक यादव का कहना है कि रोजाना लगभग एक लाख लीटर की खपत होती है। वर्तमान में 50-60 फीसदी दूध बाजार में नहीं आ पा रहा है।
नियामाताबाद संवाददाता के अनुसार नरेंद्र सिंह एकौनी में डेयरी है। इसमें 70 गायें है जिससे रोजाना 700 लीटर दूध का उत्पादन है। यह दूध वाराणसी मे मिठाई की दुकान पर जाता था। लेकिन लाकडाउन में दुकानें बंद हो गई। आधा दूध तो बंधी में चला जाता है। बाकी दूध को दीनदयाल नगर में 10 रुपये प्रति लीटर बेचना पड रहा है।
धानापुर संवाददाता के अनुसार पशुपालकों ने दूध को कम रेट पर औने-पौने दामों में बेच देते हैं। उसके बाद जो दूध बचता है उसका खोवा तैयार कर देते हैं। इसके अलावा दूध को फाड़कर पनीर भी तैयार कर लेते है। फिर खोवा व पनीर को बाजार में या गांव में ही ग्राहकों में कम रेट करके बेच दे रहे हैं।
कंदवा संवाददाता के अनुसार लाकडाउन में दूध को बर्बाद होने से बचाने के लिए पशुपालक दूध से दही जमाकर घी निकाल रहे हैं। वहीं कुछ गांवों में अब भी भट्ठियां चल रही हैं और लोग 100 रुपए किलो खोवा बेच रहे हैं। कुछ लोग तो पनीर फाड़ रहे हैं और सब्जी से सस्ता और फायदेमंद बता कर गांवों में बेच रहे हैं। लोग इसे ले भी रहे हैं। अदसड़ गांव के रमेश यादव, जितेंद्र यादव और कैलाश यादव ने बताया कि लाकडाउन के चलते व्यवसाय चौपट हो गया है। अब दूध को सड़क पर फेंक नहीं सकते। इसलिए दूध को बर्बाद होने से बचाने के लिए दही व घी का काम करके किसी तरह दूध का खपत किया जा रहा है।
इलिया संवाददाता के अनुसार पशुपालक अपने दूध को थोक मंडियों में न ले जाकर गांव कस्बों में घूम-घूम कर बेच रहे हैं। साथ ही दूध से खोवा व पनीर बना तैयार कर सस्ते दर पर 100 से लेकर 130 रुपये प्रति किलो बेच रहे हैं।
धीना संवाददाता के अनुसार पूरे देश में लाकडाउन के चलते पशु पालन का व्यवसाय मुसीबत बन गया है। वर्तमान समय में पशुओं के खाने का भी खर्च नहीं निकल पा रहा है। दिलीप माइक्रो कामधेनु डेयरी के संचालक दिलीप कुमार पांडेय का कहना है कि लाक डाउन में दूध की फैक्ट्री एवम मिठाई की दुकान बंद हो जाने से दूध को खरीदने वाले नहीं मिल रहे हैं। आलम खातों पुर निवासी लक्षण यादव पशुपालक का कहना है कि लाकडाउन के चलते लोकल बाजार में भैंस का दूध 20 प्रति लीटर के हिसाब से बेचना पड़ रहा है जिससे पशुओं के भूसे का भी खर्च नहीं निकल पा रहा है