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Chandauli News: 20 से ज्यादा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर ताला, 5 से 10 किमी दूर मिलता है इलाज

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नौगढ़ के मझगाई आरोग्य मेंदिर पर लटका ताला। संवाद - फोटो : Archive
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पीडीडीयू नगर। ग्रामीणों को उनके घर के आसपास प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चंदौली में खोले गए 179 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और आयुष्मान आरोग्य मंदिर जिले में खुद स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर बन गए हैं। जिले के 20 से ज्यादा केंद्रों पर नियमित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं। उनपर ताला लटका रहता है। वहीं कई जगह सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) की तैनाती नहीं होने से भवन तैयार होने के बावजूद मरीजों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। नतीजा यह है कि मामूली बुखार, सिरदर्द, शुगर, बीपी की जांच या दवा के लिए भी ग्रामीणों को पांच से 10 किलोमीटर तक की दूरी तय कर प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा निजी अस्पताल जाना पड़ रहा है।
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इनसेट
इसलिए हुई थी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों की शुरुआत
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार ने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की शुरुआत की थी। इन केंद्रों पर सामान्य बीमारियों की जांच और उपचार के साथ गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, किशोरियों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, दवा वितरण सहित कई सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। लेकिन जिले के कई केंद्रों पर यह व्यवस्था कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है।

केस-1
महीने में एक-दो बार ही पहुंचते हैं स्वास्थ्यकर्मी
टांडाकला। चहनिया ब्लॉक के सरौली ग्राम सभा में बना हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर करीब दो साल से बंद पड़ा है। ग्रामीणों के मुताबिक केंद्र पर लंबे समय से ताला लटका है और महीनों से सफाई भी नहीं हुई है। परिसर में लगा हैंडपंप भी खराब पड़ा है। ऐसे में केंद्र पर पानी तक की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मी यहां नियमित रूप से नहीं आते। महीने में एक-दो बार पोलियो की दवा पिलाने के लिए स्वास्थ्यकर्मी पहुंचते हैं। इसके बाद केंद्र फिर बंद हो जाता है। बृजेश यादव, ओमप्रकाश, सुनील राम और मुलायम ने बताया कि गांव में किसी को बुखार, सिरदर्द या अन्य सामान्य बीमारी होने पर भी करीब पांच किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
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केस-2

चार आरोग्य मंदिरों पर दो साल से सीएचओ नहीं
कंदवा। बरहनी ब्लॉक में 18 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर सीएचओ की तैनाती की गई थी। असना, भुजना, पौनी और औरइया पट्टी के केंद्रों पर तैनात सीएचओ करीब दो वर्ष पहले नौकरी छोड़ चुके हैं। इसके बाद से इन केंद्रों पर सीएचओ की तैनाती नहीं हो सकी है। वहीं इमिलिया, कसवढ़, कम्हरिया और देवकली में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के भवन बनकर तैयार हैं। रंग-रोगन भी हो चुका है, लेकिन यहां भी सीएचओ की तैनाती नहीं हो पाई है। इमिलिया के अनुज सिंह, शिवाजी सिंह तथा कम्हरिया के अंजनी सिंह, बिट्टू सिंह और रिंकू सिंह ने कहा स्वास्थ्यकर्मी की तैनाती नहीं होने से ग्रामीणों को इलाज कराने दूर नहीं जाना पड़ता है। पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि जिन आरोग्य मंदिरों पर सीएचओ की तैनाती नहीं है, उनके संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।

केस-3
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नौगढ़ में निरीक्षण के समय ही खुलते हैं दरवाजे
नौगढ़। विकास खंड के बरवाडीह, गोलाबाद, बरवाडीहख्, देवरीकला और मझगांई गांवों में बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर उपकेंद्रों पर भी नियमित स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई केंद्रों पर अक्सर ताला लटका रहता है। मंगलवार को भी कुछ केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मी नदारद मिले और ताले बंद थे।
ग्रामीणों के अनुसार, इन केंद्रों पर रोजाना स्वास्थ्य परीक्षण और निशुल्क दवा वितरण होना चाहिए। इसके अलावा किशोरियों को माहवारी संबंधी जानकारी और सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने, गर्भवती महिलाओं को आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड की दवाएं देने की व्यवस्था है। ग्रामीणों की शुगर, बीपी और अन्य स्वास्थ्य जांच भी की जानी है। लेकिन केंद्रों के नियमित नहीं खुलने से इन योजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। चिकनी आरोग्य मंदिर की व्यवस्था भी एनएम के भरोसे चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सीएचओ के नियमित नहीं आने के कारण मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है।

केस-4

एएनएम तैनात फिर भी जच्चा-बच्चा केंद्र बदहाल
धीना। बरहनी ब्लॉक के देवकली गांव में पांच वर्ष पूर्व बना जच्चा-बच्चा केंद्र बदहाल है। यहां एएनएम की तैनाती के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। भवन में टूटे-फूटे, धूल और गंदगी भरी है। ग्रामीण विनोद सिंह का आरोप है कि एएनएम जच्चा-बच्चा केंद्र में बैठने के बजाय आंगनबाड़ी केंद्र से काम करती हैं। वहीं एएनएम सविता देवी ने बताया कि जच्चा-बच्चा केंद्र में बैठने की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण आंगनबाड़ी केंद्र से काम करना पड़ता है। ग्रामीण राणा सिंह ने बताया कि करीब दस वर्ष पहले बना हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का अब तक हस्तांतरण नहीं हुआ है। इससे भवन बदहाल होता जा रहा है।


इनसेट
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हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर मिलने वाली सुविधाएं
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सामान्य बीमारियों की जांच और उपचार
शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच
गर्भवती महिलाओं की देखभाल व आवश्यक दवाएं
आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड का वितरण
किशोरियों को माहवारी एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी
सेनेटरी पैड का वितरण
-गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग
-आंख, नाक और कान से संबंधित प्राथमिक जांच
जरूरत पड़ने पर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर करना

इनसेट
ग्रामीणों का दर्द
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ग्रामीणों की सहूलियत के लिए खोले गए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर शोपीस बनकर रह गए हैं। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति नहीं होने से ग्रामीणों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। - मुलायम यादव, गोलाबाद
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20 से ज्यादा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर ताला लटकने के कारण ग्रामीण सीएचसी या निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। - सौरव, नौगढ़

कोट-
जिन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर ताला बंद रहता है, जांच कराकर उन्हें खुलवाया जाएगा। वहीं, सीएचओ की तैनाती शासन स्तर से की जाती है। - पारितोष मिश्रा, सीएमओ, चंदौली

नौगढ़ के मझगाई आरोग्य मेंदिर पर लटका ताला। संवाद- फोटो : Archive

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