अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दूसरे दिन सोमवार को जनवादी महिला समिति की
कार्यकर्ताओं ने चकिया नगर में जुलूस निकाल कर महिला अधिकारों के पक्ष में
नारेबाजी की तथा गांधी पार्क में सभा कर केंद्र और प्रदेश सरकारों की महिला
विरोधी नीतियों को उजागर किया।
इसके बाद उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
सभा
में जनवादी महिला समिति की जिलामंत्री लालमनी देवी ने कहा कि अमेरिका में
काम के घंटे कम करने तथा वेतन भत्ता बढ़ाने की मांग को लेकर कपड़ा मिलों की
महिलाओं ने 100 वर्ष पूर्व आंदोलन किया था। जिसके चलते अंतर्राष्ट्रीय
महिला दिवस की शुरुआत हुई है।
लेकिन भारत में महिला उत्थान के कार्यक्रमों
का लाभ आम महिलाओं को नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार,
खाद्यान्न सुरक्षा में उनको तरजीह नहीं दी गई है तथा केंद्र की राजग तथा
प्रदेश की सपा सरकार महिला विरोधी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार
कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने में जुटी है।
सभा के बाद महिलाओं ने
उपजिलाधिकारी को ज्ञापन दिया। सभा में फूला देवी, सीमा देवी, मंजू देवी,
किशनउती देवी एवं जुगमानी देवी सहित तमाम महिलाओं ने विचार व्यक्त किए।
अध्यक्षता कलावती देवी ने किया।
महिलाओं को किया जागरूक
चकिया।
महिला समाख्या वाराणसी के तहत गठित जननी समिति द्वारा स्थानीय काली जी के
पोखरे पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दूसरे दिन महिलाओं को विभिन्न
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत जागरूक किया।
इस दौरान जननी समिति की
कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली तथा गीत, नाटक के माध्यम से स्त्री जागरूकता
के विविध आयामों को प्रस्तुत किया। इस दौरान जिला कार्यक्रम समन्वयक रंजना,
सुनीता, रीता, मंशा, गीता, राधा एवं महारानी सहित तमाम महिलाओं ने सक्रिय
रूप से भाग लिया।
इसी क्रम में मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान एवं
मानवाधिकार संरक्षण मंच के तत्वावधान में मझराती बंधी की वनवासी बस्ती में
संगोष्ठी हुई। जिसमें महिलाओं से उनके अधिकारों के प्रति सचेष्ट रहने की
अपील की गई। संगोष्ठी में संस्था के प्रमुख भानुजा शरण लाल ने कहा कि
महिलायें अपने अंदर छिपी शक्ति को पहचाने तथा बिना संकोच सामाजिक, आर्थिक
और सांस्कृतिक क्षेत्र में आगे आकर नेतृत्व करने का प्रयास करें।
संगोष्ठी
में गणेश प्रसाद विश्वकर्मा ने कहा कि महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों का
गठन कर उनके माध्यम से स्वावलंबी बनने की ओर अग्रसर होना चाहिए। संगोष्ठी
में हिमांशु तिवारी, प्रभात सिंह यादव, चंद्रशेखर वनवासी, सरिता वनवासी,
शनीचरी वनवासी एवं फूलमती वनवासी ने विचार व्यक्त किए।