आम आदमी की शिकायतों के निस्तारण का एक अहम माध्यम रही शिकायत पेटिकाएं अब जिले के अधिकांश सरकारी विभागों से गायब हो चुकी हैं। जिले के 44 विभागों में केवल जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) कार्यालय में ही शिकायत पेटिका लगी है। बिजली, पानी, सड़क समेत अन्य समस्याओं को लेकर रोजाना करीब 50 से 60 ऑफलाइन शिकायतें विभागों के पटल पर पहुंच रही हैं, लेकिन बिजली निगम को छोड़कर किसी भी विभाग में इन शिकायतों का रजिस्टर में रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है। ऐसे में शिकायतें निस्तारित हो रही हैं या नहीं, इसका भी कोई ठोस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
हमारी टीम ने बुधवार को जिले भर के विभागों की पड़ताल की। इसमें विकास भवन के 17 विभागों के अलावा बेसिक, माध्यमिक, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य, बिजली और जलनिगम जैसे विभागों की पड़ताल की गई। विकास भवन में डीडीओ कार्यालय के सामने शिकायत पेटिका लगी दिखी। इसके अलावा किसी भी जगह पर एक भी शिकायत पेटिका नहीं देखी गई।
इसलिए जरूरी है शिकायत पेटिका
अधिकारी कई बार अपनी ड्यूटी के कारण ऑफिस से बाहर रहते हैं। इसके अलावा कई बार दूर-दराज से आने वाला व्यक्ति ऑफिस टाइम में नहीं पहुंच पाता है। ऐसे में उसके पास अपनी समस्या अधिकारी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम विभागों के सामने लगी शिकायत पेटिका होती है। बदलते दौर में भले ही ऑनलाइन शिकायतों का चलन बढ़ा है, लेकिन दूर-दराज और कम पढ़े-लिखे लोग अब भी लेटर के माध्यम से ही अपनी शिकायतें दर्ज कराते हैं। डीएम व एसपी के दरबार में जनसुनवाई में उनकी शिकायतें निस्तारित हो जाती हैं या फिर वे सीधे अधिकारी से मिलकर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं, लेकिन अन्य विभागों में ऐसा नहीं हो पाता है। ऐसे में हर विभाग के सामने शिकायत पेटिका लगाई जाती थी।
दृश्य-1 एक महीने पहले खुली थी पेटिका, अब तो चाबी भी गायब
डीडीओ कार्यालय के सामने लगी शिकायत पेटिका को करीब एक महीने पहले खोला गया था। उसके बाद से अब तक उसे नहीं खोला गया है। पेटिका की चाबी पर धूल बैठ गई थी। वहां के कर्मचारियों से जब कहा गया कि एक बार खोलकर उसकी स्थिति देखें तो बताया गया कि फिलहाल उसकी चाबी कहां है, इसकी जानकारी नहीं है। ऐसे में अगर कोई शिकायती पत्र उसमें होगा भी तो फिर उसका निस्तारण कैसे होगा?
दृश्य-2 बिजली, पानी व सड़क वाले विभाग में सबसे अधिक शिकायत
बिजली, पानी व सड़क को लेकर सबसे अधिक समस्याएं हर दिन विभागों में पहुंचती हैं। बिजली निगम ज्ञानपुर व नजदीकी पावर हाउस पर हर दिन 10 से 12 शिकायतें पहुंच रही हैं, जिन्हें रजिस्टर पर नोट किया जा रहा है। जलनिगम कार्यालय पर भी हर दिन सात से आठ शिकायतें पहुंचती हैं। वहीं पीडब्ल्यूडी कार्यालय पर हर दिन औसतन चार से पांच शिकायतें होती हैं। इन्हें रिसीव तो किया जाता है, लेकिन किसी भी रजिस्टर पर दर्ज नहीं किया जाता है। यही हाल लगभग अन्य विभागों का भी है।
दृश्य-3 जिनके अधिकारी बैठते हैं बाहर, वहां भी शिकायती पेटिका नहीं
जिले में रोडवेज परिवहन और आयुर्वेद विभाग के अधिकारी वाराणसी बैठते हैं। यहां रोडवेज बसें न चलने की अक्सर शिकायतें रहती हैं। वहीं स्टेशन पर दुर्व्यवस्थाओं को लेकर भी आम आदमी में रोष रहता है। इसके साथ ही आयुर्वेद विभाग में भी अक्सर दवाओं की कमी की शिकायत रहती है। ऐसे में शिकायत करने के लिए पेटिका नहीं लगी है।
प्रतिक्रिया
क्या बोले लोग ठीक है कि अब ऑनलाइन का दौर आ गया है, लेकिन अब भी लोग अपनी समस्याएं शिकायती पेटिका के माध्यम से अधिकारी तक पहुंचाते हैं। विभागों के सामने शिकायत पेटिकाएं होनी चाहिए। - श्रीकांत जायसवाल, अध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल, गोपीगंज।
किसानों में अब भी एक बड़ा वर्ग सीधे शिकायत नहीं कर पाता। कार्यालय पहुंचने पर अगर शिकायती पेटिका होती है तो वह आसानी से अपनी बात उसमें लिखकर डाल देता है। विभागों के पास जरूर होना चाहिए। - श्यामबहादुर सिंह, अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन।
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वर्तमान समय में सारी व्यवस्थाएं आनलाइन हो गई हैं। जिसमें शिकायतों के लिए भी टोल फ्री नंबर के अलावा आईजीआरएस जैसे पोर्टल सक्रिय हैं। ऐसे में शिकायत पेटिकाओं की प्रासंगिकता कम हुई है। शिकायत पेटिका लगाया जाना आवश्यक है। इसको लेकर को स्पष्ट निर्देश नहीं है। शिकायत पेटिका कम उसे सुझाव पेटिका कहा जा सकता है। अब आनलाइन पटल पर ही लोगों को व्यवस्थाएं मिल रही हैं। - शैलेश कुमार, जिलाधिकारी। -
बिजली निगम के एक्सईएन निखिल वर्मा ने बताया कि बिजली संबंधी शिकायतों के लिए काउंटर लगाया है। जहां शिकायतें नोट भी किया जाता है। बिजली छोटी समस्याओं को तत्काल हल कर लिया जाता है। वहीं बड़ी समस्या में समय लगता है। हर दिन करीब 10 से 12 शिकायतें आती हैं।
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जलनिगम ग्रामीण के एक्सईएन रामबली ने बताया कि सीयूजी नंबर व फोन पर शिकायतें आती हैं। जिसे निस्तारित कराया जाता है। लोग टोल फ्री नंबर का प्रयोग करते हैं। औसतन सात से आठ शिकायतें आफ लाइन आ जाती हैं।
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पीडब्ल्यूडी एक्सईएन संदीप सरोज ने बताया कि आफिस के पटल पर जो शिकायतें आती हैं। उसे निस्तारित कराया जाता है। हर दिन औसतन तीन से चार शिकायतें मिलती है।