पीडीडीयू नगर। जिले में चलाए गए विभिन्न कार्यक्रमों के बाद भी लोगों में परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता का अभाव है। खासकर जिले के पुरुष इसमें काफी पिछड़े हुए हैं। जिले में पिछले एक वर्ष में कुल 2222 महिलाओं ने नसबंदी कराया है वहीं नसबंदी कराने वाले पुरूषों की संख्या मात्र 22 है। यानि महिलाओं के सापेेक्ष एक प्रतिशत पुरुषों ने ही नसबंदी कराया है। इसमें भी सबसे हैरानी वाली बात है कि परिवार नियोजन में पढ़े-लिखों की संख्या कम है। जिन पुरुषों ने नसबंदी कराई है वे सभी ग्रामीण हैं। शहरों में इसकी संख्या शून्य है।
परिवार नियोजन के लिए पुरुषों नसबंदी को लेकर अभी भी समाज में तमाम भ्रांतियां है जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसको लेकर तमाम जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं। प्रदेश में पिछड़े जनपद के नाम से शुमार चंदौली के पुरूष नसबंदी में भी काफी पिछड़े हुए हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो पढ़े लिखे पुरूष नसबंदी के प्रति ज्यादा लापरवाह हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ पुरूष इसके लिए आगे आ रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि पीडीडीयू नगर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय, चकिया स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय और चंदौली शहर स्थित पं.कमलापति त्रिपाठी जिला चिकित्सालय में पूरे एक वर्ष में एक भी पुरुषों ने नसबंदी नहीं कराया है। जबकि यहां सुविधाएं भी बेहतर हैं और लोगों केा जागरूक भी किया जाता है। वहीं जिले में सबसे ज्यादा बरहनी विकासखंड में सात पुरुषों ने नसबंदी कराई है।,
चकिया विकासखंड में सबसे ज्यादा और नौगढ़ में सबसे कम नसबंदी
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जिले में चकिया विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं परिवार नियोजन को लेकर ज्यादा सजग हैं। जिले के नौ विकासखंडों में सबसे ज्यादा चकिया में 322 महिलाओं ने नसबंदी कराया है। वहीं वनांचल क्षेत्र नौगढ़ विकासखंड में मात्र 134 महिलाओं ने ही नसबंदी कराया है। नौगढ़ विकासखंड के ज्यादातर गांव जंगलों से आच्छादित हैं। संभव है उनतक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंच पाई हो या फिर उनके जागरूकता की कमी है। हालांकि ज्यादा पिछले क्षेत्र नौगढ़ में ही हैं और परिवार में दो से ज्यादा बच्चे भी हैं। किसी किसी परिवार में तो छह से सात बच्चे भी हैं।संवाद
पीडीडीयू नगर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय जिले का एकमात्र महिला चिकित्सालय है। यहां महिलाओं से संबंधि खासकर प्रसव आदि होते हैं और महिलाओं के विभिन्न रोगों का भी इलाज होता है। लेकिन यहां पिछले एक वर्ष में सबसे कम मात्र 32 महिलाओं का ही नसबंदी हो चुका है। हालांकि यही की महिला चिकित्साधिकारी डॉ.महिमा को इस वर्ष 40 से अधिक महिलाओं को परिवार नियोजन के संसाधन उपयोग कराने में वाराणसी मंडल में दूसरा स्थान मिला और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उन्हें सम्मानित भी किया। लेकिन यहां नसबंदी सबसे कम हुई है। इसके पीछे का एक कारण इसका शहर में होना भी हो सकता है। शहर की महिलाएं ज्यादातर इलाज निजी चिकित्सालयों में कराती हैं। वहीं ग्रामीण महिलाएं नसबंदी आदि पास के स्वास्थ्य केंद्रों पर ही कराती हैं। जबकि महिला चिकित्सालय में काफी बेहतर व्यवस्था है।
विकासखंडमहिला नसबंदीपुरूष नसबंदी
नौगढ़ -13401
चकिया322-00
शहाबगंज271-01
नियामताबाद309-03
चंदौली14404
बरहनी-241-07
सकलडीहा-16602
चहनिया21703
धानापुर29701
राजकीय महिला चिकित्सालय-32-00
जिला अस्पताल,चंदौली4100
जिला अस्पताल,चकिया4800
परिवार नियोजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वहीं स्वास्थ्यकर्मी और स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ी आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्री भी लोगों को नसबंदी के लिए प्रेरित करती हैं। हालांकि महिलाओं के सापेक्ष पुरूष नसबंदी की संख्या काफी कम है। पुरूषों में अभी भी कुछ भ्रम है। जबकि यह काफी सुरक्षित और सही है।-डॉ.युगल किशोर राय, सीएमओ, चंदौली